मुख्यमंत्री ने कहा कि, उत्तर प्रदेश अत्यंत उर्वरा भूमि है, पर्याप्त जल संसाधन है, बेहतर कनेक्टिविटी से अच्छादित हुआ है। किसान जिन सुविधाओं के लिए पहले तरसता था, आज डबल इंजन की सरकार उन सभी सुविधाओं से उन्हें अच्छादित करने का परिणाम है कि, यूपी आज देश में सबसे ज्यादा कृषि उत्पादन करने वाले राज्य में से एक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी कहते हैं कि किसान की आमदनी को बढ़ाने का पहला मंत्र है- लागत कम हो, उत्पादन ज्यादा हो।
बाराबंकी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाराबंकी में प्रगतिशील किसान सम्मेलन एवं रबी सत्र की किसान पाठशाला 8.0 के शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने किसानों से कम लागत और अधिक उत्पादन पर चर्चा की। साथ ही कहा, किसान पाठशाला के इस कार्यक्रम में मैं आप सभी का स्वागत करता हूं। हम यहां बहुत नजदीक से देख रहे हैं कि खेती क्या है? खेती की चुनौतियां क्या है? कम लागत और अधिक उत्पादन से हम कैसे किसानों को खुशहाल कर सकते हैं?
मुख्यमंत्री ने कहा कि, उत्तर प्रदेश अत्यंत उर्वरा भूमि है, पर्याप्त जल संसाधन है, बेहतर कनेक्टिविटी से अच्छादित हुआ है। किसान जिन सुविधाओं के लिए पहले तरसता था, आज डबल इंजन की सरकार उन सभी सुविधाओं से उन्हें अच्छादित करने का परिणाम है कि, यूपी आज देश में सबसे ज्यादा कृषि उत्पादन करने वाले राज्य में से एक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी कहते हैं कि किसान की आमदनी को बढ़ाने का पहला मंत्र है- लागत कम हो, उत्पादन ज्यादा हो।
MSP का भुगतान पिछले 8 वर्षों से लगातार किसानों को प्राप्त हो रहा है,
अब बिचौलिया नहीं, किसान या खेती करने वाला व्यक्ति ही अपनी उपज को क्रय केंद्र में बेच सकता है… pic.twitter.com/4oNNcvMLmX
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) December 12, 2025
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उन्होंने आगे कहा, MSP का भुगतान पिछले 8 वर्षों से लगातार किसानों को प्राप्त हो रहा है। अब बिचौलिया नहीं, किसान या खेती करने वाला व्यक्ति ही अपनी उपज को क्रय केंद्र में बेच सकता है। तकनीक और अच्छी किस्म का बीज किसानों को उपलब्ध हों, इसके लिए उत्तर प्रदेश के अंदर लगातार कार्य हो रहे हैं…
मुख्यमंत्री ने आगे कहा, तकनीक और अच्छी किस्म का बीज किसानों को उपलब्ध हों, इसके लिए उत्तर प्रदेश के अंदर लगातार कार्य हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश ने पिछले 8 वर्षों में कृषि विकास की दर को 8.6% से बढ़ाकर 17.7% पहुंचाया है। आज प्रदेश के अंदर 79 कृषि विज्ञान केंद्र सक्रिय हैं, जिसमें कई कृषि विज्ञान केंद्र तो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में कार्य कर रहे हैं।