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8th Pay Commission : क्या है फिटमेंट फैक्टर फॉर्मूला? जिससे बदल जाएगी कर्मचारियों की किस्मत, 400 फीसदी सैलरी हाइक…

8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) पर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। वेतन में सामान्य बढ़ोतरी और पेंशन के अलावा लोगों के बीच इस बात पर चर्चा चल रही है कि सरकार असल में अपने कर्मचारियों को कितना सैलरी हाइक दे सकती है। 8वें वेतन आयोग के तहत एक ऐसा फॉर्मूला है, जिससे वरिष्ठ कर्मचारियों की सैलरी में 400 प्रतिशत तक का हाइक मिल सकता है।

By santosh singh 
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नई दिल्ली। 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) पर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। वेतन में सामान्य बढ़ोतरी और पेंशन के अलावा लोगों के बीच इस बात पर चर्चा चल रही है कि सरकार असल में अपने कर्मचारियों को कितना सैलरी हाइक दे सकती है। 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के तहत एक ऐसा फॉर्मूला है, जिससे वरिष्ठ कर्मचारियों की सैलरी में 400 प्रतिशत तक का हाइक मिल सकता है। आखिर ऐसा कौन सा फॉर्मूला है, जिससे 400% सैलरी हाइक (400% salary hike) मिलने की संभावना है, आइए जानते हैं?

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क्या है 400% सैलरी हाइक का फॉर्मूला?

इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन’ (IRTSA) की ओर से एक प्रस्ताव सामने आया है। यह एसोसिएशन उन प्रमुख कर्मचारी संगठनों में से एक है जो 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के साथ चल रही चर्चाओं में हिस्सा ले रहे हैं। एसोसिएशन ने सभी के लिए एक ही ‘फिटमेंट फैक्टर’ (Fitment Factor) की मांग करने के बजाय, अलग-अलग पदों पर मौजूद कर्मचारियों के हिसाब से पांच अलग-अलग ‘फिटमेंट फैक्टर’ का प्रस्ताव दिया है। पिछले वेतन आयोग से होने वाली सैलरी हाइक (Salary Hike) की तुलना में यह कुछ अलग है।

लेवल 1 से 5 वालों को 2.92 का फिटमेंट फैक्टर मिले।

लेवल 6 से 8 वालों को 3.50 का फिटमेंट फैक्टर मिले।

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लेवल 9 से 12 वालों को 3.80 का फिटमेंट फैक्टर मिले।

लेवल 13 से 16 वालों को 4.09 का फिटमेंट फैक्टर मिले।

लेवल 17 से 18 वालों को 4.38 का फिटमेंट फैक्टर मिले।

क्या है फिटमेंट फैक्टर?

8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के तहत फिटमेंट फैक्टर वो अमाउंट है, जो कर्मचारियों की मूल सैलरी पर मिलती है। इसका उपयोग तब सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के संशोधित वेतन और पेंशन की गणना करने के लिए किया जाता है, जब कोई नया वेतन आयोग लागू होता है।

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कर्मचारियों की मौजूदा सैलरी में फिटमेंट फैक्टर से गुणा करने पर नई सैलरी प्राप्त होती है।

नई सैलरी = मौजूदा सैलरी x फिटमेंट फैक्टर

उदाहरण के लिए, लेवल 17 से 18 वालों को 3 लाख रुपये मूल वेतन मिलता है और उनके लिए प्रस्तावित 4.38 फिटमेंट फैक्टर के हिसाब से उनकी सैलरी बढ़कर लगभग 13.14 लाख रुपये तक पहुंच सकती है।

फिटमेंट फैक्टर के डिवीजन से क्या होगा फायदा?

एसोसिएशन का इस फिटमेंट फैक्टर को पांच भागों में बांटने का तर्क है कि मौजूदा व्यवस्था में जूनियर और सीनियर कर्मचारियों के वेतन के बीच का अंतर (गैप) अनुचित रूप से कम हो जाता है, खासकर उन तकनीकी कर्मचारियों के मामले में जो रेलवे में सुरक्षा से जुड़े बेहद अहम कामों को संभालते हैं।

एसोसिएशन ने तकनीकी रेलवे कर्मचारियों के लिए एक अलग वेतन ढांचे की भी मांग की है। इसके अलावा, उन्होंने तेजी से प्रमोशन देने, सालाना वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) को बढ़ाकर 5 प्रतिशत करने और वेतन संशोधन की गणना शुरू होने से पहले 50 प्रतिशत ‘महंगाई भत्ते’ (Dearness Allowance) को मूल वेतन में ही मिला देने की भी मांग की है।

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7वें वेतन आयोग (7th Pay Commission) के तहत, फिटमेंट फैक्टर 2.57 तय किया गया था। अब, अलग-अलग सेक्टरों के कर्मचारी संगठन इससे कहीं ज्यादा की मांग कर रहे हैं। कुछ संगठनों ने 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग की है तो कुछ इससे भी ज्यादा की मांग कर रहे हैं।

8वें वेतन आयोग पर लिए जा रहे परामर्श

8वां वेतन आयोग (8th Pay Commission) खुद एक गहन परामर्श चरण में प्रवेश कर चुका है। सरकार ने 3 नवंबर, 2025 को औपचारिक रूप से 8वें वेतन आयोग का गठन किया, जो 1946 में शुरू हुई एक परंपरा को आगे बढ़ाता है। तब से, भारत ने सात वेतन आयोग देखे हैं, जो आमतौर पर हर दशक में एक बार आते हैं।

रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाले इस पैनल ने दिल्ली और कई अन्य क्षेत्रों में पहले ही बैठकें कर ली हैं। अब कर्मचारी संघों, पेंशनभोगी समूहों और सरकारी संगठनों के साथ राष्ट्रव्यापी परामर्श अभ्यास के हिस्से के रूप में 6 और 7 जुलाई को भुवनेश्वर के दौरे की घोषणा की गई है। आयोग ने लखनऊ, हैदराबाद, श्रीनगर, लद्दाख और जम्मू-कश्मीर में भी परामर्श निर्धारित किए हैं। इस बार सैलरी हाइक को लेकर चल रही चर्चाएं कहीं अधिक जटिल आर्थिक पृष्ठभूमि के बीच हो रही हैं।

महंगाई की चिंताएं अभी भी बहुत ज्यादा हैं। पेंशन की देनदारियां बढ़ रही हैं। राजकोषीय दबाव और भी कड़े हो गए हैं। लेकिन इन सभी बातों के बावजूद कर्मचारियों की उम्मीदें पहले से भी कहीं ज्यादा हैं। यही ठीक वह कारण है कि चल रहे परामर्शों पर काफी बारीकी से नजर रखी जा रही है।

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