भारत और ब्रिटेन के बीच गुरुवार को मुक्त व्यापार समझोते (एफटीए) पर हस्ताक्षर किए। इससे अब दोनों देशों के बीच चीजों का लेन-देन और व्यापार पहले से आसान और सस्ता हो जाएगा। इससे ब्रिटिश व्हिस्की, कारों और कई वस्तुओं पर टैरिफ में कमी आएगी। इसके साथ ही द्विपक्षीय व्यापार में सालाना लगभग 34 अरब अमेरिकी डॉलर की बढ़ोतरी होगी। पीएम मोदी ने इसे ऐतिहासिक बताया है।
नई दिल्ली। भारत और ब्रिटेन के बीच गुरुवार को मुक्त व्यापार समझोते (एफटीए) पर हस्ताक्षर किए। इससे अब दोनों देशों के बीच चीजों का लेन-देन और व्यापार पहले से आसान और सस्ता हो जाएगा। इससे ब्रिटिश व्हिस्की, कारों और कई वस्तुओं पर टैरिफ में कमी आएगी। इसके साथ ही द्विपक्षीय व्यापार में सालाना लगभग 34 अरब अमेरिकी डॉलर की बढ़ोतरी होगी। पीएम मोदी ने इसे ऐतिहासिक बताया है।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के साथ द्विपक्षीय बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, इस एक वर्ष में हमें तीसरी बार मिलने का मौका मिल रहा है। अपने आप में मैं इसे बहुत महत्वपूर्ण मानता हूं। ब्रिटेन और भारत स्वाभाविक साझेदार हैं। आज हमारे संबंधों में एक ऐतिहासिक दिन है। हमारे दोनों देश मुक्त व्यापार समझौते (FTA) और दोहरे योगदान समझौते (डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन) पर हस्ताक्षर कर रहे हैं। यह अपने आप में भारत और ब्रिटेन की भावी पीढ़ियों के लिए एक बहुत ही मज़बूत मार्ग प्रशस्त करेगा। यह व्यापार और वाणिज्य में एक नया अध्याय जोड़ रहा है।
आज हमारे (भारत – UK) संबंधों में एक ऐतिहासिक दिवस है।
मुझे प्रसन्नता है कि कई वर्षों की मेहनत के बाद आज दोनों देशों के बीच Comprehensive Economic and Trade Agreement संपन्न हुआ है।
ये समझौता मात्र आर्थिक साझेदारी नहीं, बल्कि साझा समृद्धि की योजना है।
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– पीएम श्री @narendramodi… pic.twitter.com/9u2wbfvF7J
— BJP (@BJP4India) July 24, 2025
पहलगाम हमले की निंदा पर यूके का जताया अभार
पीएम मोदी ने कहा कि पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की कठोर निंदा के लिए हम प्रधानमंत्री स्टार्मर और उनकी सरकार का आभार व्यक्त करते हैं। हम इस बात पर भी सहमत हैं, कि अतिवादी विचारधारा वाली शक्तियों को लोकतांत्रिक आजादी का दुरुपयोग नहीं करने दिया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि हिंद-प्रशांत में शांति और स्थिरता, यूक्रेन में चल रहे संघर्ष और पश्चिम एशिया की स्थिति पर हम विचार साझा करते रहे हैं। सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान अनिवार्य है। आज के युग की मांग विस्तारवाद नहीं विकासवाद ही है।
आईटी और सर्विस सेक्टर को नई उड़ान
भारतीय आईटी पेशेवरों, एजुकेशन एक्सपर्ट्स और सर्विस सेक्टर से जुड़े लोगों के लिए यूके का हाई-वैल्यू मार्केट अब और अधिक सुलभ होगा। इसके साथ ही भारत और ब्रिटेन के बीच हुए ‘डबल कंट्रब्यूशन कंवेंशन’ के तहत भारतीय कर्मचारियों को यूके में 3 साल तक सोशल सिक्योरिटी योगदान से छूट मिलेगी। इससे कंपनियों और कर्मचारियों दोनों को लाभ होगा।