क्या आप जानते हैं कि दुनिया का सबसे बड़ा महाकाव्य, 'महाभारत', एक ऐसी अनोखी शर्त के साथ लिखा गया था, जिसने भगवान गणेश को भी सोच में डाल दिया था?
Ganesh Chaturthi Special : क्या आप जानते हैं कि दुनिया का सबसे बड़ा महाकाव्य, ‘महाभारत’, एक ऐसी अनोखी शर्त के साथ लिखा गया था, जिसने भगवान गणेश को भी सोच में डाल दिया था?
महर्षि वेदव्यास ने महाभारत की रचना तो कर ली थी, लेकिन इसे लिखना किसी साधारण इंसान के बस की बात नहीं थी। तब ब्रह्मा जी के कहने पर, व्यास जी विघ्नहर्ता भगवान गणेश के पास पहुँचे और उनसे इसे लिखने की प्रार्थना की।
बुद्धि के देवता गणेश जी तैयार तो हुए, लेकिन उन्होंने एक बेहद कठिन शर्त रख दी। गणेश जी ने कहा—”अगर मैंने एक बार लिखना शुरू किया, तो मेरी कलम रुकनी नहीं चाहिए। अगर आप बोलते-बोलते रुके, तो मैं उसी समय लिखना छोड़ दूँगा!”
व्यास जी जानते थे कि लगातार बोलना नामुमकिन है। उन्होंने चालाकी से शर्त मान ली, लेकिन अपनी भी एक शर्त रख दी—”प्रभु! आप जो भी लिखेंगे, उसे पहले पूरी तरह समझकर ही लिखेंगे। बिना अर्थ समझे आप एक भी श्लोक नहीं लिखेंगे।”
और इस तरह शुरू हुआ इतिहास का सबसे बड़ा लेखन! जब भी व्यास जी को आराम करना होता, वे एक बेहद कठिन और गूढ़ श्लोक बोल देते। गणेश जी जब तक उस श्लोक का गहरा अर्थ समझते, उतने समय में व्यास जी आगे की कहानी सोच लेते थे।
इसी लेखन के दौरान एक समय ऐसा आया जब गणेश जी की कलम टूट गई! लेकिन शर्त के मुताबिक उन्हें रुकना नहीं था। तब उन्होंने तुरंत अपना एक दांत तोड़ दिया और उसे ही कलम बनाकर लिखना जारी रखा। इसी वजह से उन्हें ‘एकदंत’ भी कहा जाता है।
3 साल की इस अद्भुत जुगलबंदी के बाद महाभारत पूर्ण हुई। यह कथा हमें सिखाती है कि कितनी भी बड़ी शर्त या मुसीबत हो, बुद्धि और समझदारी से हर मुश्किल का हल निकाला जा सकता है।