गुजरात एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) की जांच में एक ऐसा खुलासा हुआ है जिसने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। जैश-ए-मोहम्मद से प्रभावित बताए जा रहे पांच आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद सामने आया है कि शुरुआती जांच में किसी विदेशी हैंडलर की सीधी भूमिका नहीं मिली है। एजेंसियों का कहना है कि आरोपी सोशल मीडिया पर..
गुजरात एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) की जांच में एक ऐसा खुलासा हुआ है जिसने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। जैश-ए-मोहम्मद से प्रभावित बताए जा रहे पांच आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद सामने आया है कि शुरुआती जांच में किसी विदेशी हैंडलर की सीधी भूमिका नहीं मिली है। एजेंसियों का कहना है कि आरोपी सोशल मीडिया पर मौजूद कट्टरपंथी सामग्री, भड़काऊ वीडियो और आपत्तिजनक साहित्य के प्रभाव में आकर खुद ही आतंकी गतिविधियों की ओर बढ़े। जांच में पालनपुर और भरूच के कुछ मदरसों का भी जिक्र सामने आया है, जहां से जुड़े कुछ युवाओं तक इंटरनेट के जरिए कट्टरपंथी सामग्री पहुंचने की बात सामने आई है। हालांकि जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।
नफरत फैलाने वाला साहित्य और जैश का झंडा बरामद
एटीएस के उपमहानिरीक्षक (DIG) सुनील जोशी के मुताबिक आरोपियों के ठिकानों से बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक किताबें और प्रचार सामग्री बरामद हुई है। जांच में जैश-ए-मोहम्मद का झंडा, पाकिस्तान स्थित आतंकी मौलाना मसूद अजहर के कथित भड़काऊ वीडियो और जिहाद से जुड़ा साहित्य मिलने का दावा किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी इस सामग्री का इस्तेमाल दूसरे युवाओं को प्रभावित करने के लिए भी कर रहे थे।
ऑनलाइन सीखी बम बनाने की जानकारी, 8 बार किए ट्रायल
एटीएस की जांच में यह भी सामने आया है कि मुख्य आरोपी अमद जामिया अबुल हसन और उसके साथियों ने वर्ष 2023 से फरवरी 2024 के बीच अलग-अलग स्थानों पर कथित तौर पर आठ बार आईईडी और टाइमर आधारित विस्फोटक उपकरणों का परीक्षण किया। जांच एजेंसियों का दावा है कि विस्फोटक तैयार करने से जुड़ी जानकारी इंटरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से जुटाई गई थी। शुरुआती जांच में इसे आरोपियों की अपनी योजना बताया जा रहा है हालांकि सभी पहलुओं की पड़ताल अभी जारी है।
ऑनलाइन मंगाए केमिकल और उपकरण
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी मोहम्मद अमीन शेरा समेत अन्य लोग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए विस्फोटक तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले केमिकल और अन्य सामान मंगाते थे। एटीएस ने आरोपियों के कब्जे से करीब 1.30 लाख रुपये नकद और विस्फोटक सामग्री तैयार करने में इस्तेमाल होने वाला सामान बरामद किया है।
डिजिटल सबूत खंगाल रही जांच एजेंसी
मामले की तह तक पहुंचने के लिए एटीएस अब आरोपियों की डिजिटल गतिविधियों की गहन जांच कर रही है। अधिकारियों ने इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और मेटा से जुड़े प्लेटफॉर्म से भी जानकारी मांगी है, ताकि आरोपियों के संपर्क, चैट, ग्रुप और ऑनलाइन गतिविधियों का पूरा रिकॉर्ड जुटाया जा सके।
UAPA के तहत दर्ज है मामला
यह पूरी कार्रवाई 8 जुलाई 2024 को दर्ज उस एफआईआर से जुड़ी है, जिसमें गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। गुजरात एटीएस और राजस्थान पुलिस संयुक्त रूप से पूरे नेटवर्क की जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े हर व्यक्ति और कड़ी की पहचान कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।