पवन खेड़ा ने आगे लिखा, मूर्खता यहीं समाप्त नहीं होती। आरएसएस के पूर्वी उत्तर प्रदेश प्रभारी कृष्णमोहन को राम मंदिर ट्रस्ट का महासचिव नियुक्त कर दिया गया है, जबकि खुद उन पर इस घोटाले को दबाने में भूमिका के आरोप हैं। उन्हें बड़े दायित्व से पुरस्कृत करने के बजाय ट्रस्ट से बाहर का रास्ता दिखाया जाना चाहिए था।
नई दिल्ली। राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोपों के बाद आज ट्रस्ट की तरफ से एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक के बाद एक प्रेस कॉफ्रेंस की गई। वहीं, अब इसको लेकर सियासत भी खूब हो रही है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा,
चंपत राय और अनिल मिश्रा की इस्तीफे मंजूर करके राम मंदिर ट्रस्ट ने पूरी तरह यह स्वीकार कर लिया है कि पिछले एक महीने से देश को हिला देने वाली ‘चंदा चोरी’ की रिपोर्टें वाकई सत्य हैं। यह स्वागत योग्य खबर है कि प्रभु राम के पावन मंदिर से वे लोग हटाए जा रहे हैं जो वर्षों तक इसे लूटते रहे।
लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। हास्यास्पद बात यह है कि यह घोषणा ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष द्वारा की गई-वही व्यक्ति जिस पर इसके वित्त की निगरानी, पारदर्शिता सुनिश्चित करने और इसकी संपत्तियों की रक्षा करने का दायित्व होता है। वह अपनी ज़िम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकता, और न ही ट्रस्ट का कोई अन्य सदस्य इस दायित्व से किनारा कर सकता है, जिनकी देखरेख में इतना बड़ा रैकेट वर्षों तक फलता-फूलता रहा।
चंपत राय और अनिल मिश्रा की इस्तीफे मंजूर करके राम मंदिर ट्रस्ट ने पूरी तरह यह स्वीकार कर लिया है कि पिछले एक महीने से देश को हिला देने वाली ‘चंदा चोरी’ की रिपोर्टें वाकई सत्य हैं।
यह स्वागत योग्य खबर है कि प्रभु राम के पावन मंदिर से वे लोग हटाए जा रहे हैं जो वर्षों तक इसे लूटते…— Pawan Khera 🇮🇳 ಪವನ್ ಖೇರಾ (@Pawankhera) July 6, 2026
पवन खेड़ा ने आगे लिखा, मूर्खता यहीं समाप्त नहीं होती। आरएसएस के पूर्वी उत्तर प्रदेश प्रभारी कृष्णमोहन को राम मंदिर ट्रस्ट का महासचिव नियुक्त कर दिया गया है, जबकि खुद उन पर इस घोटाले को दबाने में भूमिका के आरोप हैं। उन्हें बड़े दायित्व से पुरस्कृत करने के बजाय ट्रस्ट से बाहर का रास्ता दिखाया जाना चाहिए था।
देश टुकड़ों-टुकड़ों में इस्तीफे नहीं चाहता। उसे ट्रस्ट को पूरी तरह भंग करके उसका पुनर्गठन चाहिए। देश ट्रस्ट के हर सदस्य के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट-निगरानी में एक स्वतंत्र जांच चाहता है। जवाबदेही सिर्फ ट्रस्ट पर समाप्त नहीं होनी चाहिए। नरेंद्र मोदी तक भी ज़िम्मेदारी तय की जानी चाहिए, जिन्होंने ट्रस्ट का गठन किया और उसके कई सदस्यों की नियुक्ति की; योगी आदित्यनाथ सरकार तक, जिसने वर्षों तक इस लूट और डकैती को प्रभावी जांच के बिना चलते रहने दिया; और उस आरएसएस-वीएचपी की भी जिम्मेदारी तय किए जाने की जरूरत है, जिसने दशकों से करोड़ों भारतीयों की कीमत पर खुद को मालामाल करने के लिए भगवान राम के नाम का दोहन किया है।