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बांग्लादेश में कट्टरपंथी जमात की हार से भारत भी खुश! जानें- तारिक रहमान की जीत कितनी अहम

BNP wins in Bangladesh : तारिक़ रहमान की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेतृत्व वाले गठबंधन ने बांग्लादेश के 13वें पार्लियामेंट्री चुनाव में प्रचंड जीत हासिल की है। जिसके साथ ही कट्टरपंथी विचारधारा वाले जमात ए इस्लामी के देश में शासन करने का सपना अधूरा रह गया है। इस बीच, जमात की हार से भारत के लिए बड़ी राहत की खबर है। पीएम नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान की जीत पर उन्हें बधाई दी है और भारत-बांग्लादेश के फिर एक साथ काम करने की इच्छा जतायी है।

By Abhimanyu 
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BNP wins in Bangladesh : तारिक़ रहमान की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेतृत्व वाले गठबंधन ने बांग्लादेश के 13वें पार्लियामेंट्री चुनाव में प्रचंड जीत हासिल की है। जिसके साथ ही कट्टरपंथी विचारधारा वाले जमात ए इस्लामी के देश में शासन करने का सपना अधूरा रह गया है। इस बीच, जमात की हार से भारत के लिए बड़ी राहत की खबर है। पीएम नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान की जीत पर उन्हें बधाई दी है और भारत-बांग्लादेश के फिर एक साथ काम करने की इच्छा जतायी है।

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पीएम नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को एक्स पोस्ट में लिखा, “मैं बांग्लादेश में पार्लियामेंट्री चुनावों में बीएनपी को बड़ी जीत दिलाने के लिए मिस्टर तारिक रहमान को दिल से बधाई देता हूं। यह जीत बांग्लादेश के लोगों का आपके लीडरशिप पर भरोसा दिखाती है। भारत एक डेमोक्रेटिक, प्रोग्रेसिव और सबको साथ लेकर चलने वाले बांग्लादेश के सपोर्ट में खड़ा रहेगा। मैं हमारे कई तरह के रिश्तों को मज़बूत करने और हमारे कॉमन डेवलपमेंट गोल्स को आगे बढ़ाने के लिए आपके साथ काम करने का इंतज़ार कर रहा हूं।”

जमात की हार भारत के लिए अहम क्यों? 

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनकी पार्टी हमेशा भारत की समर्थक रही हैं, लेकिन खालिदा जिया के नेतृत्व में बीएनपी का इतिहास भारत के पक्ष में नहीं रहा। वहीं, जब बांग्लादेश में तख़्तापलट हुआ तो कट्टरपंथी संगठन देश में हावी नजर आए। जिनमें जमात ए इस्लामी भी शामिल रहा है, जिसे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से प्रभावित माना जाता है। अगर जमात सत्ता में आती, तो पाकिस्तान से दोस्ती के और गहराने की आशंका थी, क्योंकि मुहम्मद युनूस के नेतृत्व वाली सरकार में भारत के खिलाफ माहौल बनाया गया और पाकिस्तान से करीबीयां बढ़ रही थीं।

हालांकि, 17 साल बाद बांग्लादेश लौटे तारिक रहमान ने देश में लोकतंत्र को कयाम करने की उम्मीदें जगाई है, जोकि भारत के नजरिए में जमात की तुलना में कम नुकसानदायक है। स्वदेश लौटने पर रहमान ने भारत के साथ अच्छे संबंधों की इच्छा जताई थी, लेकिन बांग्लादेश की संप्रभुता और हितों को प्राथमिकता देने का भी संदेश दिया था। अब बीएनपी की सरकार आने के बाद भारत और बांग्लादेश के बेकह रिश्ते फिर से सुधरने की उम्मीद है।

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