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India’s famous Naga temples : भारत के प्रसिद्ध नाग मंदिर जहां होती है नाग देवता की पूजा, दर्शन से सर्प दोष से मिलती है मुक्ति

शिव आदि देव हैं। सनातन परंपरा में नागों का भगवान शिव से गहरा संबंध माना गया है। भगवान शिव के गले में विराजमान नाग उनकी शक्ति, योग और काल पर विजय के प्रतीक माने जाते हैं। नाग पंचमी सनातन लोक जीवन का एक प्रमुख त्योहार है। हिन्दू पंचांग के अनुसार सावन माह की शुक्ल पक्ष के पंचमी को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है।

By अनूप कुमार 
Updated Date

India’s famous Naga temples : शिव आदि देव हैं। सनातन परंपरा में नागों का भगवान शिव से गहरा संबंध माना गया है। भगवान शिव के गले में विराजमान नाग उनकी शक्ति, योग और काल पर विजय के प्रतीक माने जाते हैं। नाग पंचमी सनातन लोक जीवन का एक प्रमुख त्योहार है। हिन्दू पंचांग के अनुसार सावन माह की शुक्ल पक्ष के पंचमी को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन नाग देवता या सर्प की पूजा की जाती है और उन्हें दूध से स्नान कराया जाता है। आइये जानते है भारत के प्रसिद्ध नाग मंदिरों के बारे में।

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भगवान नागचंद्रेश्वर मंदिर ,उज्जैन
भारत की धार्मिक नगरी उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर केवल भगवान शिव की महिमा के लिए ही प्रसिद्ध नहीं है, बल्कि यहां एक ऐसा अद्भुत मंदिर भी है जिसके दर्शन वर्ष में केवल एक दिन ही होते हैं। यह है भगवान नागचंद्रेश्वर मंदिर, जो अपनी अनोखी परंपरा और पौराणिक मान्यताओं के कारण पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है।

मंदिर का रहस्य
नागचंद्रेश्वर मंदिर उज्जैन के प्रसिद्ध महाकाल मंदिर परिसर की तीसरी मंजिल पर स्थित है। मान्यता है कि इस मंदिर के कपाट पूरे वर्ष बंद रहते हैं और केवल नाग पंचमी के पावन पर्व पर ही श्रद्धालुओं के लिए खोले जाते हैं।

काशी में नाग कुआँ
आज के पावन पर्व पर वाराणसी (काशी) में नाग कुआँ नामक स्थान पर बहुत बड़ा मेला लगता है। किंवदन्ति है कि इस स्थान पर तक्षक गरूड़ जी के भय से बालक रूप में काशी संस्कृत की शिक्षा लेने हेतु आये, परन्तु गरूड़ जी को इसकी जानकारी हो गयी,और उन्होंने तक्षक पर हमला कर दिया, परन्तु अपने गुरू जी के प्रभाव से गरूड़ जी ने तक्षक नाग को अभय दान दिया, उसी समय से यहाँ नाग पंचमी के दिन से यहाँ नाग पूजा की जाती है,यह मान्यता है, कि जो भी नाग पंचमी के दिन यहाँ पूजा अर्चना कर नाग कुआँ का दर्शन करता है, उसकी जन्मकुन्डली के सर्प दोष का निवारण हो जाता है।

मनारशाला नागराज मंदिर, केरल
केरल का मनारशाला नागराज मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध नाग मंदिरों में से एक है। यह मंदिर नाग देवताओं की आराधना और प्राचीन परंपराओं के लिए जाना जाता है। मान्यता है कि यहां नाग देवताओं की पूजा करने से परिवार की सुख-समृद्धि और संतान सुख की प्राप्ति होती है।

नाग वासुकी मंदिर, प्रयागराज
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में स्थित नाग वासुकी मंदिर का संबंध नागराज वासुकी से माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के समय वासुकी नाग ने देवताओं और असुरों की सहायता की थी।
यह मंदिर नाग पंचमी के अवसर पर विशेष रूप से श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

नाग मंदिर, कश्मीर
कश्मीर की परंपरा में नाग पूजा का विशेष महत्व रहा है। यहां कई प्राचीन नाग तीर्थ मौजूद हैं, जहां जल स्रोतों और प्राकृतिक स्थानों को नाग देवताओं से जोड़ा जाता है। कश्मीर के प्राचीन ग्रंथों जैसे कल्हण की ‘राजतरंगिणी’ और ‘नीलमत पुराण’ में नाग संस्कृति और नागों की पूजा का विस्तृत वर्णन मिलता

धौली नाग मंदिर, उत्तराखंड
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में नाग देवताओं की पूजा की प्राचीन परंपरा रही है। धौली नाग जैसे मंदिर स्थानीय आस्था और प्रकृति संरक्षण की भावना से जुड़े हुए हैं।

नाग पूजा का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में नागों को भगवान शिव के आभूषण और भगवान विष्णु के शेषनाग स्वरूप से जोड़ा जाता है। नाग पंचमी के दिन नाग देवताओं की पूजा करके प्रकृति, जीव-जगत और पर्यावरण के प्रति सम्मान प्रकट किया जाता है।

निष्कर्ष
भारत के नाग मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं हैं, बल्कि वे हमारी हजारों वर्षों पुरानी संस्कृति, लोक परंपराओं और प्रकृति के साथ जुड़ाव के प्रतीक हैं। इन मंदिरों में आस्था, इतिहास और पौराणिक कथाओं का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।

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