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IRGC ने भारत आ रहे जहाज पर होर्मुज में किया हमला, जहाजों को जब्त कर ईरान ले गई फोर्स

ईरान (Iran) की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दो जहाजों पर हमला कर उन्हें कब्जे में ले लिया है। इन जहाजों को जब्त कर ईरान (Iran) ले जाया जा रहा है। इनमें से एक जहाज भारत आ रहा था।

By santosh singh 
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नई दिल्ली। ईरान (Iran) की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दो जहाजों पर हमला कर उन्हें कब्जे में ले लिया है। इन जहाजों को जब्त कर ईरान (Iran) ले जाया जा रहा है। इनमें से एक जहाज भारत आ रहा था।

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रिपोर्ट के मुताबिक, इन जहाजों की पहचान MSC Francesca और Epaminodes के रूप में की गई है। जहाजों के मालिकों से तुरंत संपर्क नहीं हो सका है। इनमें से एक जहाज Epaminodes दुबई से गुजरात के मुंद्रा पोर्ट आ रहा था। बता दें कि इससे पहले अमेरिका ने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (Vice President J.D. Vance) की पाकिस्तान यात्रा (Visit to Pakistan) को स्थगित कर दिया था। ट्रंप ने अमेरिका और ईरान के सीजफायर को दो हफ्ते के लिए बढ़ा दिया था। यह घटनाक्रम वेस्ट एशिया में तनाव को दर्शाता है।

दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते होर्मुज जलडमरूमध्य में एक बार फिर बारूद की गंध फैल गई है। बुधवार को ईरानी सेना ने अंतरराष्ट्रीय जलसीमा से गुजर रहे तीन व्यापारिक जहाजों पर अंधाधुंध गोलीबारी की, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर संकट के बादल और गहरे हो गए हैं। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका और इस्राइल के साथ ईरान की शांति वार्ता को लेकर प्रयास किए जा रहे थे।

आखिर ईरान ने जहाजों पर हमला क्यों किया?

ईरान की अर्धसैनिक ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड’ ने बुधवार सुबह इस दुस्साहसी कार्रवाई को अंजाम दिया। खबरों के मुताबिक, ईरानी सेना ने पहले एक कंटेनर जहाज पर गोलियां चलाईं और उसके कुछ ही देर बाद दूसरे जहाज को निशाना बनाया। ईरानी मीडिया का दावा है कि इन जहाजों ने सेना की चेतावनियों को नजरअंदाज किया था, इसलिए उन पर कानूनी रूप से कार्रवाई की गई। पकड़े गए जहाजों की पहचान एमएससी फ्रांसिस्का और एपाामिनोड्स के रूप में हुई है, जिन्हें ईरानी सेना अपने साथ ले गई है। इसके कुछ देर बाद एक तीसरे जहाज यूफोरिया पर भी हमला किया गया, जिसके ईरानी तट पर फंसे होने की खबर है।

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ट्रंप का संघर्षविराम का फैसला काम नहीं आया?

यह हमला उस वक्त हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने बुधवार को खत्म होने वाले संघर्षविराम को अनिश्चित काल के लिए बढ़ाने का ऐलान किया था। ट्रंप ने उम्मीद जताई थी कि इससे बातचीत का रास्ता खुलेगा। हालांकि, ट्रंप ने यह भी साफ कर दिया कि ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी जारी रहेगी। ईरान इसी बात से नाराज है। ईरान के कूटनीतिज्ञों का कहना है कि जब तक अमेरिका अपनी घेराबंदी नहीं हटाता, तब तक वे किसी भी तरह की शांति वार्ता के लिए मेज पर नहीं आएंगे। यानी सीजफायर होने के बावजूद समुद्र में छिड़ी यह जंग खत्म होने का नाम नहीं ले रही है।

समुद्री जंग का क्या असर कितना?

होर्मुज में बढ़ते तनाव का सीधा असर आपकी जेब पर पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (बेंट क्रूड) की कीमत 98 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जो युद्ध शुरू होने के बाद से 35 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है। तेल और गैस की सप्लाई रुकने या महंगी होने से न केवल पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ रहे हैं, बल्कि खाने-पीने की चीजों और अन्य सामानों की ढुलाई भी महंगी हो गई है। अगर यह समुद्री रास्ता लंबे समय तक बंद रहा या यहां हमले जारी रहे, तो वैश्विक मंदी का खतरा और बढ़ जाएगा और आम आदमी के लिए घर चलाना मुश्किल हो जाएगा।

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