लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करने वाली तीन सदस्यीय समिति की रिपोर्ट संसद के आगामी मानसून सत्र में पेश की जाएगी। मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो रहा है। ऐसे में जस्टिस वर्मा के इस्तीफे के बावजूद उनके खिलाफ संसद में कार्रवाई की संभावना पर चर्चा तेज हो गई है...
नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करने वाली तीन सदस्यीय समिति की रिपोर्ट संसद के आगामी मानसून सत्र में पेश की जाएगी। मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो रहा है। ऐसे में जस्टिस वर्मा के इस्तीफे के बावजूद उनके खिलाफ संसद में कार्रवाई की संभावना पर चर्चा तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल के विधायकों के एक कार्यक्रम में ओम बिरला ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार की अध्यक्षता वाली जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट उन्हें सौंप दी है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट संसद में पेश होने के बाद आगे की कार्रवाई का फैसला सदन करेगा।
पहले दिन पेश हो सकती है रिपोर्ट
सूत्रों के मुताबिक जांच रिपोर्ट मानसून सत्र के पहले दिन ही लोकसभा में रखी जा सकती है। बताया जा रहा है कि जस्टिस वर्मा को हटाने के प्रस्ताव पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के सांसदों ने हस्ताक्षर किए थे। इस प्रस्ताव का समर्थन करने वालों में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद और अनुराग ठाकुर भी शामिल थे।
इस्तीफे के बाद भी बना हुआ है कानूनी सवाल
जस्टिस यशवंत वर्मा पर वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे थे। पिछले साल मार्च में उनके नई दिल्ली स्थित सरकारी आवास पर आग लगने की घटना के बाद कथित तौर पर बड़ी मात्रा में जले हुए नोट मिलने का मामला सामने आया था। इसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग उठी थी और उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट से वापस इलाहाबाद हाई कोर्ट भेज दिया गया था।
हालांकि जस्टिस वर्मा इस साल अप्रैल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा सौंप चुके हैं लेकिन कानूनी विशेषज्ञों के बीच इस बात को लेकर अभी स्पष्ट राय नहीं है कि इस्तीफे के बाद भी जजेज इन्क्वायरी एक्ट के तहत उन्हें हटाने की प्रक्रिया जारी रह सकती है या नहीं। बताया जा रहा है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट की वेबसाइट पर उनका नाम अब भी मौजूदा न्यायाधीशों की सूची में शामिल है।
जांच के दौरान खुद को बताया था निर्दोष
जस्टिस वर्मा ने तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना द्वारा गठित आंतरिक जांच समिति और बाद में बनी जांच समिति के समक्ष खुद को निर्दोष बताया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि उनके आवास से कथित तौर पर बरामद हुई बड़ी रकम वहां कैसे पहुंची। अब सभी की नजरें 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र पर हैं जहां इस मामले की जांच रिपोर्ट पेश होने के बाद आगे की कार्रवाई की दिशा तय हो सकती है।