सनातनधर्म में पितरों के निमित्त तर्पण और दान करने की परंपरा है। धर्म ग्रंथों में वर्णित है कि पितरों को काले तिल और कुशा के साथ तर्पण करने का विशेष फल प्राप्त होता है। अमावस्या का दिन श्राद्ध और तर्पण के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।
Jyeshtha Amavasya 2026 Date : सनातनधर्म में पितरों के निमित्त तर्पण और दान करने की परंपरा है। धर्म ग्रंथों में वर्णित है कि पितरों को काले तिल और कुशा के साथ तर्पण करने का विशेष फल प्राप्त होता है। अमावस्या का दिन श्राद्ध और तर्पण के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। इसी प्रकार ज्येष्ठ महीने की अमावस्या का अपना एक अलग ही महत्व है। इसी प्रकार अमावस्या के दिन भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है।
अमावस्या तिथि
साल 2026 में यह पावन तिथि 16 मई, शनिवार के दिन पड़ रही है। वैसे तो अमावस्या की शुरुआत 15 मई की सुबह से ही हो जाएगी और यह 16 मई की दोपहर तक रहेगी, लेकिन उदया तिथि की परंपरा के अनुसार मुख्य पूजा-पाठ 16 मई को ही की जाएगी। यह दिन इसलिए भी खास होगा क्योंकि इसी दिन शनि जयंती और वट सावित्री का व्रत भी मनाया जाएगा, जिससे इस दिन की महिमा और भी बढ़ जायेगी।
दान
इस दिन पर गरीबों को भोजन कराएं और अपनी क्षमता के अनुसार दान आदि करें। ऐसा करने से महादेव प्रसन्न होते हैं।
दीपक जलाना
ज्येष्ठ अमावस्या के दिन, घर, नदी, मंदिर और पितरों की तस्वीर के पास दीपक जलाना शुभ माना जाता है। खासकर, पीपल के पेड़ पर दीपक जलाने से पितृ प्रसन्न होते हैं। साथ ही, घर के मुख्य द्वार पर तिल के तेल का दीपक जलाने से मां लक्ष्मी का आगमन होता है।
गाय की सेवा करना
घर में साफ-सफाई करना, गाय की सेवा करना और पितरों का तर्पण करना शुभ माना जाता है।