"कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी... यानी हिंदू धर्म का वो सबसे पावन दिन, जब हर सुहागन महिला अपने पति की लंबी उम्र , प्रेम, समर्पण और विश्वास के लिए निर्जला व्रत रखती है। जी हां, हम बात कर रहे हैं करवा चौथ की। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य का वरदान प्राप्त होता है।
Karva Chauth 2026 : “कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी… यानी हिंदू धर्म का वो सबसे पावन दिन, जब हर सुहागन महिला अपने पति की लंबी उम्र , प्रेम, समर्पण और विश्वास के लिए निर्जला व्रत रखती है। जी हां, हम बात कर रहे हैं करवा चौथ की। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य का वरदान प्राप्त होता है। आइए जानते हैं इस पावन व्रत की वो दिव्य कथा, जो सदियों से हमारी आस्था का प्रतीक बनी हुई है।”
करवा चौथ का व्रत हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र व्रतों में से एक माना जाता है। कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाने वाला यह उपवास केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह पति-पत्नी के अटूट प्रेम, समर्पण और विश्वास का प्रतीक है।
शुभ मुहूर्त और समय (2026)
• चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 29 अक्टूबर 2026 को सुबह 01:06 बजे से
• चतुर्थी तिथि समाप्त: 29 अक्टूबर 2026 को रात 10:09 बजे तक
• पूजन मुहूर्त: शाम 05:38 बजे से शाम 06:56 बजे तक
• व्रत का समय: सुबह 06:31 बजे से रात 08:17 बजे तक
• चन्द्रोदय का समय: रात 08:17 बजे (विभिन्न स्थानों पर चंद्रमा दिखने का समय थोड़ा अलग हो सकता है)
“शास्त्रों के अनुसार, करवा चौथ व्रत की शुरुआत सबसे पहले देवी-देवताओं के समय से हुई थी। लेकिन लोककथाओं में सती वीरवती की कहानी सबसे ज्यादा प्रचलित है। वीरवती सात भाइयों की अकेली और लाडली बहन थी। विवाह के बाद, जब उसने अपना पहला करवा चौथ का व्रत रखा, तो भूख-प्यास से उसकी हालत बिगड़ने लगी।
अपनी लाडली बहन की यह दशा भाइयों से देखी नहीं गई। उन्होंने दूर पहाड़ी पर एक दीपक जलाया और छलनी की ओट में उसे रखकर वीरवती से कहा कि देखो, चंद्रमा निकल आया है। वीरवती भाइयों के इस छलावे को समझ नहीं पाई और उसने नकली चांद को देखकर अपना व्रत खोल दिया।”
“गलत समय पर व्रत खोलने के कारण वीरवती के पति की तबियत अचानक बहुत खराब हो गई। वीरवती को अपनी भूल का अहसास हुआ। वो रोने लगी और उसने पूरे साल पूरी निष्ठा के साथ हर चतुर्थी का व्रत रखा। उसकी सच्ची भक्ति और पश्चाताप को देखकर माता पार्वती और भगवान शिव प्रसन्न हुए। मां गौरी ने उसे आशीर्वाद दिया और उसके पति को जीवनदान मिला। तभी से यह माना जाता है कि जो भी महिला पूरी श्रद्धा से यह व्रत रखती है, उसे अखंड सौभाग्य का वरदान मिलता है।”
“इस दिन सुहागन महिलाएं सुबह सूर्योदय से पहले सरगी खाकर व्रत का संकल्प लेती हैं। पूरे दिन बिना अन्न-जल के रहती हैं। शाम को मां गौरी, भगवान शिव और गणेश जी की पूजा की जाती है। और फिर आता है वो पल, जिसका सबको इंतजार रहता है—चांद का दीदार। छलनी से चंद्रमा को अर्घ्य देकर, पति के हाथों से पानी पीकर महिलाएं अपना व्रत पूरा करती हैं। यह सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि आपसी प्रेम और विश्वास का सबसे खूबसूरत त्योहार है।”
“करवा चौथ का यह पावन व्रत आप सभी के जीवन में खुशियां और अटूट प्रेम लेकर आए। आप सभी को करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनाएं! अगर आपको यह कहानी अच्छी लगी हो, तो वीडियो को लाइक करें, अपने दोस्तों के साथ शेयर करें और ऐसी ही धार्मिक जानकारियों के लिए हमारे चैनल को सब्सक्राइब करना न भूलें। जय माता दी!”