उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज में हुए अग्निकांड में 15 लोगों की जान चली गयी, जबकि कई लोग घायल हैं। मृतकों में सबसे ज्यादा छात्र शामिल हैं। वहीं, इस घटना के बाद फायर एनओसी को लेकर फिर से सवाल उठने लगे हैं। कहा जा रहा है कि, लखनऊ में कई ऐसे होटल, कोचिंग संस्थान, व्यावसायिक भवन हैं, जिनमें फायर के कोई भी इंतजाम नहीं हैं।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज में हुए अग्निकांड में 15 लोगों की जान चली गयी, जबकि कई लोग घायल हैं। मृतकों में सबसे ज्यादा छात्र शामिल हैं। वहीं, इस घटना के बाद फायर एनओसी को लेकर फिर से सवाल उठने लगे हैं। कहा जा रहा है कि, लखनऊ में कई ऐसे होटल, कोचिंग संस्थान, व्यावसायिक भवन हैं, जिनमें फायर के कोई भी इंतजाम नहीं हैं। या फिर ये फायर के मानक पूरे नहीं करते हैं, इसके बाद भी अधिकारियों से मिलीभगत कर ये आसानी से अपना काम कर रहे हैं।
हाल के महीनों में लखनऊ में फायर सेफ्टी को लेकर लगातार अभियान चलाए गए थे। सूत्रों की माने तो, अग्निशमन विभाग और विकास प्राधिकरण की संयुक्त जांच में कई होटल, रेस्तरां और व्यावसायिक प्रतिष्ठान अग्नि सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करते पाए गए थे। विभाग ने चेतावनी दी थी कि नियमों का पालन न करने वालों की फायर एनओसी रद्द की जा सकती है और प्रतिष्ठान सील किए जा सकते हैं। हालांकि इसके बाद विभाग इस मामले को भूल गया।
सूत्रों के अनुसार शहर में बड़ी संख्या में प्रतिष्ठान या तो बिना वैध फायर एनओसी के संचालित हो रहे हैं या उनमें सुरक्षा मानकों की गंभीर कमियां पाई गई हैं। हाल ही में कई होटलों और व्यावसायिक भवनों को नोटिस भी जारी किए गए थे।
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल फायर एनओसी जारी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि समय-समय पर निरीक्षण, आपातकालीन निकास मार्गों की जांच, अग्निशमन उपकरणों की कार्यशीलता और भवन उपयोग के स्वरूप की निगरानी भी जरूरी है। यदि जांच में लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित भवन स्वामी के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय हो सकती है।