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Lump in Uterus: बच्चेदानी या गर्भाशय में गांठ होने पर शरीर में दिखते है ये लक्षण

गर्भाशय या बच्चेदानी की वजह से महिलाएं गर्भ धारण करती हैं और इसी में बच्चे का विकास होता है। इसके बिना किसी भी महिला के लिए मां बनना संभव नहीं है। वहीं अगर इसमें किसी प्रकार की दिक्कत होती है तो मां बनने में मुश्किले आने लगती है।

By प्रिन्सी साहू 
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Lump in Uterus:  गर्भाशय या बच्चेदानी की वजह से महिलाएं गर्भ धारण करती हैं और इसी में बच्चे का विकास होता है। इसके बिना किसी भी महिला के लिए मां बनना संभव नहीं है। वहीं अगर इसमें किसी प्रकार की दिक्कत होती है तो मां बनने में मुश्किले आने लगती है।

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इसलिए किसी भी महिला की बच्चेदानी का स्वस्थ्य होना बेहद जरुरी है। कई महिलाओं को बच्चेदानी या गर्भाशय में गांठ की समस्या हो जाती है। बच्चेदानी में गांठ होने पर कई तरह की दिक्कते होती है।आज हम आपके गर्भाशय में गांठ होने पर किस तरह के लक्षण दिखाई देते है और उपचार के बारे में बताने जा रहे है।

बच्चेदानी में गांठ होने पर पेट के निचले हिस्से में दर्द होता है। इसमें पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द और तनाव महसूस होता है। अगर आपको ये दिक्कत हो रही है तो डॉक्टर से संपर्क करें।

गर्भाशय या बच्चेदानी में भारीपन और सूजन भी हो सकती है। इसके अलावा बच्चेदानी में गांठ होने पर पेट के आस पास खिंचाव महसूस होता है। इतना ही नहीं बच्चेदानी में गांठ होने पर पीरियड्स भी टाइम पर नहीं आते है। पीरियड्स अनियमित होना भी एक लक्षण है। साथ ही बच्चेदानी या गर्भाशय में गांठ होने पर पेशाब करते समय दर्द,जलन होती है। अगर आपको खुद में ये लक्षण नजर आ रहे हैं तो बिना समय गवाएं हेल्थ एक्सपर्ट से परामर्श जरुर लें।

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बच्चेदानी या गर्भाशय में गांठ होने पर ब्लूबेरी, शहतूत, रास्पबेरी और अंगूर में नेचुरल रेस्वेराट्रोल होता है। वहीं स्टडी से पता चलता है कि रेसवेराट्रोल कोशिका वृद्धि और गर्भाशय फाइब्रॉइड कोशिकाओं को बढ़ने से रोकते हैं।विटामिन सी से भरपूर संतरा जैसे खट्टे फल ना सिर्फ फाइब्रॉएड की ग्रोथ को रोकते हैं।

बल्कि इससे होने वाले फर्टिलिटी संबंधित परेशानी को भी करने का काम करते हैं। हर दिन एक से दो खट्टे फल खाने वाली महिलाओं में फाइब्रॉएड का रिस्क दूसरी महिलाओं की तुलना में कम होता है। अमरुद और अनार का सेवन भी गर्भाशय या बच्चेदानी में गांठ में फायदा करता है।

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