महापर्व—दशहरा "बुराई पर अच्छाई की जीत का मुख्य पर्व है। मर्यादा पुरुषसेत्म भगवान राम इस दिन ने रावण का वध किया था। इसी प्रकार मां दुर्गा ने महिषासुर का संहार किया था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शास्त्रों में दशहरे के दिन कुछ विशेष काम करने को बेहद शुभ माना गया है ?
Maa aparajita pooja : महापर्व—दशहरा “बुराई पर अच्छाई की जीत का मुख्य पर्व है। मर्यादा पुरुषसेत्म भगवान राम इस दिन ने रावण का वध किया था। इसी प्रकार मां दुर्गा ने महिषासुर का संहार किया था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शास्त्रों में दशहरे के दिन कुछ विशेष काम करने को बेहद शुभ माना गया है? मान्यता है कि इस दिन किए गए कुछ छोटे-छोटे काम आपकी सोई हुई किस्मत को चमका सकते हैं और आपको सालभर हर काम में सफलता दिला सकते हैं! आइए जानते हैं इन पौराणिक मान्यताओं के बारे में।”
मां दुर्गा या देवी वैष्णवी का शक्तिशाली स्वरूप
इस ब्रह्मांड में एक ऐसी अमोघ शक्ति है, जिसे आज तक कोई पराजित नहीं कर सका। वो हैं—माँ अपराजिता। जो अपने भक्तों को जीवन के हर युद्ध में ‘विजय’ का वरदान देती हैं। सनातन धर्म में मां अपराजिता की पूजा को शक्ति, साहस और अटूट विजय का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन्हें मां दुर्गा या देवी वैष्णवी का ही एक अत्यंत शक्तिशाली स्वरूप माना गया है।
पूजा के प्रभाव
“मां अपराजिता, साक्षात शक्ति स्वरूपा दुर्गा का ही एक रूप हैं। ‘अपराजिता’ का अर्थ है—जिसे कोई जीत न सके।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान श्रीराम लंका पर विजय पाने के लिए प्रस्थान कर रहे थे, तब उन्होंने विजयादशमी के दिन मां अपराजिता की विशेष पूजा की थी। इसी पूजा के प्रभाव से उन्होंने रावण पर विजय प्राप्त की।
प्रमुख मूल मंत्र
ॐ ह्रीं क्लीं अपराजिते नमः
अपराजिता स्तोत्र एवं बीज मंत्र
मूल बीज मंत्र: ॐ क्लीं श्रीं ह्रीं बीजम्
प्रारंभिक नमस्कार: ॐ नमोऽपराजितायै
अपराजिता गायत्री मंत्र
ॐ सर्वविजयेश्वरी विद्महे शक्तिः धीमहि अपराजितायै प्रचोदयात
मां के इन दिव्य मंत्रों का 11 या 108 बार जाप करें: ‘ॐ अपराजितायै नमः’। ‘अपराजिता स्तोत्र’ का पाठ करना विशेष रूप से फलदायी और विजय दिलाने वाला माना जाता है। मान्यता है कि दशहरे के दिन मां की पूजा के बाद धारण किया गया रक्षा सूत्र या उनकी भस्म आपको हर क्षेत्र में सफलता दिलाती है।”