उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (Food Safety and Drug Administration) विभाग की एक बहुत ही हैरान करने वाली लापरवाही का खुलासा हुआ है। विभाग ने पिछले 15 से 20 वर्षों में विभिन्न छापों के दौरान जब्त की गई करोड़ों रुपये की नकली, प्रतिबंधित, फिजिशियन सैंपल और सरकारी सप्लाई की गैरकानूनी दवाएं सुरक्षित गोदाम में रखने के बजाय खुले मैदान में फेंक दी हैं। बता दें कि लगातार हो रही बारिश के कारण ये सभी दवाएं भीगकर खराब हो रही हैं। इससे दवा माफियाओं के खिलाफ अदालतों में चल रहे मुकदमों के साक्ष्य ही पूरी तरह खत्म होने की कगार पर हैं।
आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (Food Safety and Drug Administration) विभाग की एक बहुत ही हैरान करने वाली लापरवाही का खुलासा हुआ है। विभाग ने पिछले 15 से 20 वर्षों में विभिन्न छापों के दौरान जब्त की गई करोड़ों रुपये की नकली, प्रतिबंधित, फिजिशियन सैंपल और सरकारी सप्लाई की गैरकानूनी दवाएं सुरक्षित गोदाम में रखने के बजाय खुले मैदान में फेंक दी हैं। बता दें कि लगातार हो रही बारिश के कारण ये सभी दवाएं भीगकर खराब हो रही हैं। इससे दवा माफियाओं के खिलाफ अदालतों में चल रहे मुकदमों के साक्ष्य ही पूरी तरह खत्म होने की कगार पर हैं।
सीएमओ कार्यालय परिसर का मामला
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्ष 2015 से पहले तक औषधि विभाग ने आगरा के सीएमओ (CMO) कार्यालय परिसर में स्थित तीन कमरों में बंद करके रखे गए माल को जब्त किया था। हाल ही में इन कमरों को खाली कराने की कवायद के दौरान इन कमरों में रखे सिरप, इंजेक्शन और टैबलेट से भरे कई कार्टन और कट्टों को बाहर गैलरी और खुले मैदान में फेंक दिया गया।
साक्ष्य नष्ट होने से दवा माफियाओं को मिलेगा फायदा
कानून विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी आपराधिक या ड्रग्स से जुड़े मामलों में आरोपियों को सजा दिलाने के लिए बरामद किया गया माल सबसे महत्वपूर्ण सबूत होता है। सुनवाई के दौरान न्यायाधीश कभी भी कोर्ट में जब्त माल को प्रस्तुत करने का आदेश दे सकते हैं। आपको बता दें कि खुले में फेंके जाने के कारण दवाओं के कार्टन गल चुके हैं, शीशियां टूट चुकी हैं और उन पर लगे कंपनियों के नाम व बैच नंबर के रैपर नष्ट हो चुके हैं। ऐसी स्थिति में यह पहचानना भी मुश्किल है कि यह किस कंपनी की दवा है। साक्ष्यों की इस दुर्दशा के कारण अदालतों में चल रहे मुकदमे बेहद कमजोर हो जाएंगे और इसका सीधा फायदा आरोपियों को मिल सकता है।
उच्चाधिकारियों ने दिए जांच के आदेश
इस बेहद गंभीर मामले पर सहायक औषधि आयुक्त अरविंद गुप्ता ने कड़ा रुख अपनाया है। साथ ही उन्होंने बताया कि यह मामला उनके संज्ञान में हाल ही में कार्यभार संभालने के बाद आया है। नियम के अनुसार जब्त दवाओं को हमेशा सुरक्षित कस्टडी में रखा जाना चाहिए। दवाएं खुले में किसने और क्यों फेंकी, इस पर संबंधित औषधि निरीक्षक से विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है और पूरे मामले की विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। ध्यान देनेवाली बात यह है कि आगरा पिछले काफी समय से नकली और नशीली दवाओं के अंतरराज्यीय सिंडिकेट के खिलाफ हो रही बड़ी कार्रवाइयों को लेकर सुर्खियों में है। इस स्थिति में ड्रग विभाग का मुख्य सबूतों की ऐसी बेकदरी करना प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करता है।