शक्तिमान एक्टर मुकेश खन्ना (Mukesh Khanna) ने एक बार फिर 'वंदे मातरम' (Vande Mataram) को 'जन गण मन' (Jana Gana Mana) की जगह देश का राष्ट्रगान बनाने की मांग की है। उन्होंने दावा किया कि 'जन गण मन' (Jana Gana Mana) ब्रिटिश शासन के दौरान जॉर्ज पंचम की तारीफ में लिखा गया था।
नई दिल्ली। शक्तिमान एक्टर मुकेश खन्ना (Mukesh Khanna) ने एक बार फिर ‘वंदे मातरम’ (Vande Mataram) को ‘जन गण मन’ (Jana Gana Mana) की जगह देश का राष्ट्रगान बनाने की मांग की है। उन्होंने दावा किया कि ‘जन गण मन’ (Jana Gana Mana) ब्रिटिश शासन के दौरान जॉर्ज पंचम की तारीफ में लिखा गया था। इसलिए इसे राष्ट्रगान नहीं माना जाना चाहिए। ‘जन गण मन’ ब्रिटिश शासक के लिए लिखा गया था मुकेश खन्ना (Mukesh Khanna) ने कहा कि ‘जन गण मन’ (Jana Gana Mana) में ‘अधिनायक’ शब्द ब्रिटिश हुक्मरान के लिए इस्तेमाल किया गया है, जिन्हें भारत के भाग्य का विधाता बताया गया था।
मुकेश खन्ना अपने बयान को लेकर बुरे फंसे थे। लोगों ने उन्हें ट्रोल किया और उनके तथ्यों पर सवाल उठाने लगे। मगर एक्टर को इससे कोई फर्क नहीं पड़ा है। वो अभी भी अपनी बात पर टिके हुए हैं, और चाहते हैं कि वंदे मातरम (Vande Mataram) भारत का राष्ट्रगान बने। न्यूज एजेंसी से बातचीत के दौरान शक्तिमान एक्टर ने कहा कि वंदे मातरम को बेवजह विवाद का मुद्दा बना दिया गया है।
उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ (Vande Mataram) में मातृभूमि के प्रति भक्ति दिखाई देती है, इसलिए इसे राष्ट्रीय स्तर पर ज्यादा महत्व मिलना चाहिए। मुकेश खन्ना के मुताबिक, आजादी के सालों बाद भी देश में अंग्रेजी शिक्षा और ब्रिटिश दौर की व्यवस्थाओं को जरूरत से ज्यादा तरजीह दी जा रही है। मुकेश ने आगे कहा कि अगर इन पंक्तियों का शाब्दिक अर्थ देखा जाए, तो ये सवाल उठता है कि ये गीत आखिर किसे संबोधित कर रहा है। मेरा मानना है कि ‘वंदे मातरम’ (Vande Mataram) को अधिक राष्ट्रीय महत्व दिया जाना चाहिए, क्योंकि ये हमारी मातृभूमि के प्रति सम्मान और समर्पण की भावना व्यक्त करता है। हमने कई सालों तक अंग्रेजों का शासन झेला। लेकिन आजादी के इतने साल बाद भी हम अंग्रेजी शिक्षा को ज्यादा महत्व देते हैं। जबकि भारत की अपनी समृद्ध और पुरानी शिक्षा परंपरा रही है।
पहले रानी एलिजाबेथ का नाम लेकर हुए थे ट्रोल इससे पहले भी मुकेश खन्ना (Mukesh Khanna) राष्ट्रगान को लेकर विवादित बयान दे चुके हैं। तब उन्होंने दावा किया था कि ‘जन गण मन’ रवींद्रनाथ टैगोर ने रानी एलिजाबेथ की तारीफ में लिखा था। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उन्हें ट्रोल किया था। यूज़र्स ने याद दिलाया था कि ‘जन गण मन’ (Jana Gana Mana) पहली बार 1911 में गाया गया था, जबकि रानी एलिजाबेथ द्वितीय का जन्म ही 1926 में हुआ था।
बता दें कि वंदे मातरम (Vande Mataram) भारत का राष्ट्रीय गीत है, जिसे बंगाल के बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1870 के आसपास लिखा था। ये एक कविता के रूप में लिखा गया गीत था, जिसे बाद में 1950 में भारत का राष्ट्रीय गीत घोषित किया गया। वहीं ऐतिहासिक तथ्यों के मुताबिक, ‘जन गण मन’ की रचना नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर ने 1911 में की थी। इसे पहली बार 27 दिसंबर 1911 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कोलकाता अधिवेशन में गाया गया था। 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने इसे भारत के राष्ट्रगान के रूप में अपनाया था। जिस पर अब मुकेश खन्ना (Mukesh Khanna) सवाल उठा रहे हैं। देखना है कि आखिर उनके बयान से क्या होता है?
राष्ट्रगीत वंदे मातरम को बंकिम चंद्र ने 1875 में लिखा
भारत के राष्ट्रगीत वंदे मातरम (Vande Mataram) को बंकिम चंद्र चटर्जी ने 7 नवंबर 1875 को अक्षय नवमी पर लिखा था। यह 1882 में पहली बार उनकी पत्रिका बंगदर्शन में उनके उपन्यास आनंदमठ के हिस्से के रूप में छपा था। 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने मंच पर वंदे मातरम (Vande Mataram) गाया। यह पहला मौका था जब यह गीत सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय स्तर पर गाया गया। सभा में मौजूद हजारों लोगों की आंखें नम हो गई थीं। वंदे मातरम एक संस्कृत वाक्यांश है, जिसका मतलब है- हे मां, मैं तुम्हें नमन करता हूं। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान वंदे मातरम (Vande Mataram) भारत को औपनिवेशिक शासन से मुक्त कराने के लिए संघर्ष कर रहे स्वतंत्रता सेनानियों का नारा बन गया था।