नेपाल के उत्तरी पहाड़ी इलाकों में बुधवार को आए विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने तबाही मचा थी। जो नजारे सामने आए, वे सिर्फ बाढ़ या भूस्खलन नहीं था। वो एक ऐसी तबाही थे जिसे शब्दों में 'विनाशकारी' कहना भी कम है। खबरों के अनुसार, नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद सभी दूरसंचार सेवाएं बंद हो गई हैं और सड़क मार्ग भी बाधित है, जिससे राहत और खोज अभियान चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
Nepal’s devastating flash floods : नेपाल के उत्तरी पहाड़ी इलाकों में बुधवार को आए विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने तबाही मचा थी। जो नजारे सामने आए, वे सिर्फ बाढ़ या भूस्खलन नहीं था। वो एक ऐसी तबाही थे जिसे शब्दों में ‘विनाशकारी’ कहना भी कम है। खबरों के अनुसार, नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद सभी दूरसंचार सेवाएं बंद हो गई हैं और सड़क मार्ग भी बाधित है, जिससे राहत और खोज अभियान चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
ईशा फाउंडेशन के 80 लोगों का अब तक कोई सुराग नहीं मिला है। ईशा फाउंडेशन के सद्गुरु जग्गी वासुदेव (Isha Foundation Sadhguru Jaggi Vasudev) ने भावुक हो कर कहा कि प्रभावित क्षेत्र में आई तबाही का पैमाना बेहद गंभीर दिखाई देता है और अब तक किसी प्रकार की आधिकारिक पुष्टि नहीं मिल सकी है। ईशा फाउंडेशन (Isha Foundation) के समूह में अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, जर्मनी और भारत समेत 19 देशों के श्रद्धालु शामिल हैं। इस बीच सद्गुरु ने प्रशासन से ग्यिरोंग (Gyirong) जाने की अनुमति भी मांगी है ताकि लापता लोगों के परिवारों की मदद की जा सके।
सद्गुरु वासुदेव ने कहा, ‘हमारे समूहों में से एक, एस-3 समूह, जिससे हम सागा में मिले थे और ट्रेकिंग के दौरान भी मुलाकात हुई थी, जब वे नीचे लौट रहे थे, उसमें 22 लोग अमेरिका से, 12 कनाडा से, 11 ऑस्ट्रेलिया से, 9 यूनाइटेड किंगडम से, 4 जर्मनी से, 3 फ्रांस से, 3 नेपाल से, 2 नीदरलैंड्स से, 2 न्यूजीलैंड से, 2 सिंगापुर से, 2 स्पेन से तथा फिनलैंड, हंगरी, इजराइल, लिथुआनिया, फिलीपींस, पुर्तगाल, रूस और दक्षिण अफ्रीका से एक-एक व्यक्ति शामिल थे।’
‘कुल मिलाकर यह संख्या 80 लोगों की है। इनमें 34 पुरुष और 46 महिलाएं शामिल हैं। इसके अलावा कुछ अन्य वॉलेंटियर्स भी थे, जो पास के होटलों में ठहरे हुए थे। इनमें तीन वॉलेंटियर और एक डॉक्टर शामिल थे। हालांकि, हमें अब तक किसी भी प्रकार की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं मिली है। लेकिन तबाही के पैमाने को देखकर स्थिति अच्छी नहीं लग रही है।’
27 अगस्त को जारी अपने संदेश में सद्गुरु ने कहा कि ग्यिरोंग में आई बाढ़ में उनके समूह के 80 लोगों के संपर्क टूट गए हैं और बाढ़ के बाद से उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई है।