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पतंजलि के प्रोडक्ट में मिला मांसाहारी तत्व, दिल्ली हाईकोर्ट ने बाबा रामदेव को जारी किया नोटिस

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) में पतंजलि आयुर्वेद और बाबा रामदेव (Baba Ramdev) समेत अन्य के खिलाफ एक जनहित याचिका दाखिल की गई है। आरोप है कि बाजार में 'दिव्य मंजन' (Divya Manjan) को शाकाहारी उत्पाद बताकर बेचा जा रहा है, जबकि उसमें मछली के तत्व शामिल हैं।

By santosh singh 
Updated Date

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) में पतंजलि आयुर्वेद और बाबा रामदेव (Baba Ramdev) समेत अन्य के खिलाफ एक जनहित याचिका दाखिल की गई है। आरोप है कि बाजार में ‘दिव्य मंजन’ (Divya Manjan) को शाकाहारी उत्पाद बताकर बेचा जा रहा है, जबकि उसमें मछली के तत्व शामिल हैं। इस याचिका को लेकर शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने केंद्र सरकार, पतंजलि, बाबा रामदेव (Baba Ramdev) , आचार्य बालकृष्ण (Acharya Balkrishna) और अन्य से जवाब मांगते हुए नोटिस जारी किया।

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जनहित याचिका में बताया गया है कि ‘दिव्य मंजन’ (Divya Manjan) या ‘दिव्य दन्त मंजन’ (Divya Dant Manjan) को शाकाहारी मानते हुए उसकी पैकिंग पर हरे रंग का विशेष चिन्ह अंकित किया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि ‘दिव्य मंजन’ (Divya Manjan)  में एक तत्व ‘सामुद्रफेन (Sepia officinalis)’ मछली से बनाया जाता है, जिसके मंजन में इस्तेमाल से वह हैरान हैं।

मंजन में मछली के प्रोडक्ट का इस्तेमाल

याचिकाकर्ता और उनके परिवार ने इस प्रोडक्ट का लंबे समय से इस्तेमाल कर यह सोचकर किया कि यह पूरी तौर पर शाकाहारी है। आखिरकार, बाबा रामदेव (Baba Ramdev)  ने खुद अपने यूट्यूब वीडियो में स्वीकार किया है कि ‘सामुद्रफेन’ (Sepia Officinalis) से निकाला जाता है और इसका ‘दिव्य मंजन’ (Divya Manjan)  में इस्तेमाल किया जा रहा था।

धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप, कार्रवाई की मांग

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याचिकाकर्ता का कहना है कि उनका परिवार ब्राह्मण परिवार से संबंध रखता है, जहां मांसाहारी उत्पादों का सेवन धार्मिक नजरिए से पूरी तरह वर्जित है। ऐसी स्थिति में, इस उत्पाद को लंबे समय से इस्तेमाल करने पर उन्हें गहरा धक्का पहुंचा है।

शिकायत पहले भी की लेकिन नहीं हुआ एक्शन

याचिकाकर्ता ने मई 2023 में दिल्ली पुलिस (Delhi Police) को शिकायत की और स्वास्थ्य मंत्रालय (Health Ministry) , भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI), केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (Central Drugs Standard Control Organization) और आयुष मंत्रालय (Ministry of AYUSH) में भी शिकायत दर्ज कराई, लेकिन अब तक किसी भी संस्था ने कोई कार्रवाई नहीं की है।

याचिकाकर्ता ने कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की है ताकि दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सके। उन्होंने इस अनजाने मांसाहारी प्रोडक्ट (Non-Vegetarian Products) के सेवन से हुई गहरी पीड़ा के लिए मुआवजा की मांग की। याचिकाकर्ता ने धार्मिक मान्यताओं ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया है और कार्रवाई की मांग की है।

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