लोकसभा में सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष के सदस्यों ने जोरदार हंगामा किया। पहले से ही हंगामे की आशंका जताई जा रही थी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (Lok Sabha Speaker Om Birla) ने 12 बजे तक सदन की कार्यवाही स्थगित की।
नई दिल्ली। लोकसभा में सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष के सदस्यों ने जोरदार हंगामा किया। पहले से ही हंगामे की आशंका जताई जा रही थी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (Lok Sabha Speaker Om Birla) ने 12 बजे तक सदन की कार्यवाही स्थगित की। इससे पहले पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने मीडिया को संबोधित किया और कहा, मेरा मानना है कि जहां तर्क, तथ्य होते हैं, वहां शोर-शराबे की कोई जरूरत नहीं होती। अगर आपके तर्क और तथ्य मजबूत हैं तो आवाज ऊंची करने की कोई जरूरत नहीं है। मुझे उम्मीद है कि संसद में चर्चाएं तर्क और तथ्यों के आधार पर होंगी। हर आवाज को सुने जाने का मौका मिलना चाहिए। संसद की यही भूमिका है।
सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा का मामला उठाया
सपा सांसद अवधेश प्रसाद (SP MP Awadhesh Prasad) ने अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे में कथित चोरी के मामले को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि भगवान राम के मंदिर में चढ़ावे की चोरी हुई। यह देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा सवाल है।
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कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने दिया लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस
कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर (Congress MP Manickam Tagore) ने लोकसभा में नीट यूजी पेपर लीक मामले (2026) पर चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है। उन्होंने सदन में इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा की मांग की है। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है। इसमें उन्होंने एक नए दल-बदल विरोधी कानून के प्रावधानों पर चर्चा की मांग की है। मनीष तिवारी ने अपने नोटिस में कहा है कि नए कानून में ऐसे बड़े पैमाने पर होने वाले राजनीतिक दल-बदल को रोका जाना चाहिए, जो अवसरवादिता के कारण होते हैं और जिनके पीछे कोई वास्तविक वैचारिक या नीतिगत मतभेद नहीं होते। उन्होंने यह भी कहा कि नए कानून में संसद और विधानसभाओं के अंदर और बाहर असहमति रखने वालों के लिए जगह होनी चाहिए।
तिवारी ने मांग की है कि दल-बदल विरोधी कानून को इस तरह तैयार किया जाए, जिससे एक तरफ राजनीतिक अवसरवाद के कारण होने वाले सामूहिक दल-बदल पर रोक लगे और दूसरी तरफ लोकतांत्रिक असहमति की स्वतंत्रता भी बनी रहे।