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युद्ध के बीच सिर्फ दर्शक बनकर रह गए पीएम शहबाज़ शरीफ, यूएस के उपराष्ट्रपति वैंस ने किया बड़ा खुलासा

यूएस के उपराष्ट्रपति जे.डी. वैंस ने इस दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया कि लेबनान, वॉशिंगटन और तेहरान के बीच चल रही शांति वार्ता का हिस्सा है, ठीक उस समय जब दो हफ़्ते का नाज़ुक युद्धविराम लागू हो रहा है।

By Satish Singh 
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नई दिल्ली। यूएस के उपराष्ट्रपति जे.डी. वैंस ने इस दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया कि लेबनान, वॉशिंगटन और तेहरान के बीच चल रही शांति वार्ता का हिस्सा है, ठीक उस समय जब दो हफ़्ते का नाज़ुक युद्धविराम लागू हो रहा है। हंगरी से रवाना होने से पहले पत्रकारों से बात करते हुए, जब उनसे पूछा गया कि क्या लेबनान को शांति प्रस्ताव में शामिल किया गया था, तो जे.डी. वैंस ने कहा कि अमेरिका ने कभी भी ऐसा कोई वादा नहीं किया था। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इस युद्धविराम का मुख्य उद्देश्य ईरान और अमेरिका के सहयोगी देशों इज़राइल और खाड़ी के अरब देशों पर ध्यान केंद्रित करना था। हमने कभी ऐसा कोई संकेत भी नहीं दिया कि ऐसा कुछ होने वाला है। हमने तो बस इतना कहा था कि यह युद्धविराम ईरान पर केंद्रित होगा और साथ ही अमेरिका के सहयोगी देशों इज़राइल और खाड़ी के अरब देशों पर भी केंद्रित होगा।

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उपराष्ट्रपति जे.डी. वैंस की इन टिप्पणियों ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ को मुश्किल में डाल दिया है, क्योंकि उन्होंने दावा किया था कि लेबनान भी इस शांति समझौते का एक हिस्सा है। एक ऐसा दावा जिसे यूएस के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू दोनों ने ही पूरी तरह से खारिज कर दिया था। खुद को मध्यस्थ बताने वाले शरीफ़ के दावों से हुई यह शर्मिंदगी इस्लामाबाद में पिछले कुछ घंटों से मची अफरा-तफरी और उथल-पुथल का ही एक हिस्सा है। पाकिस्तान ने यूएस और ईरान के बीच खुद को एक शांतिदूत के तौर पर पेश करने की कोशिश की थी, लेकिन सामने आए नए विवरणों से पता चलता है कि असल में व्हाइट हाउस ने ही पाकिस्तान पर दबाव डाला था कि वह ईरान के साथ इस अस्थायी युद्धविराम को लेकर मध्यस्थता करे। इस रिपोर्ट ने पाकिस्तान के स्वतंत्र कूटनीतिक रुख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्योंकि इसमें यह संकेत मिलता है कि इस्लामाबाद कोई निष्पक्ष मध्यस्थ नहीं था, बल्कि US के लिए इस अस्थायी युद्धविराम समझौते को आगे बढ़ाने का बस एक सुविधाजनक माध्यम मात्र था। इस तरह पाकिस्तान इन दोनों पक्षों के बीच एक सक्रिय और निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभाने के बजाय बस एक संदेशवाहक बनकर रह गया। पाकिस्तान के पीएम शहबाज़ शरीफ़, जिन्होंने सबसे पहले सार्वजनिक तौर पर दो हफ़्ते के सीज़फ़ायर का सुझाव दिया था, अब सिर्फ़ एक दर्शक बनकर रह गए हैं। जबकि सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने इसमें मुख्य भूमिका निभाई है। उन्होंने अमेरिकी अधिकारियों जिनमें डोनाल्ड ट्रंप, JD वेंस और दूत स्टीव विटकॉफ़ के साथ आपातकालीन चर्चाएं कीं।

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