सनाातन धर्म में अधिक मास का विशेष महत्व है। धर्मग्रंथों में अधिक मास की अवधि में कुछ विशेष कार्यों को करने के बारे में बताया गया है।
Purushottam Month 2026 : सनाातन धर्म में अधिक मास का विशेष महत्व है। धर्मग्रंथों में अधिक मास की अवधि में कुछ
विशेष कार्यों को करने के बारे में बताया गया है। अधिक मास को भगवान विष्णु का मास ‘पुरुषोत्तम मास’ कहा जाता है।
इस साल ज्येष्ठ मास में 19 साल बाद आठ बड़े मंगल पड़ेंगे, जिसकी शुरुआत 5 मई से होगी। अधिक मास के कारण ज्येष्ठ माह 59 दिनों का होगा।
पांच मई को पहला पहला मंगल शुरू होगा। अधिक मास, जिसे मलमास भी कहा जाता है, हिंदू पंचांग का एक विशेष महीना होता है। भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम ‘पुरुषोत्तम मास’ दिया है। इस महीने को भक्ति, तपस्या और दान के लिए उत्तम माना जाता है। मान्यता है कि इस समय किए गए पुण्य कर्मों का फल कई गुना अधिक मिलता है।भगवान विष्णु की पूजा, ‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप, गीता पाठ, सत्यनारायण कथा और निर्धन/ब्राह्मणों को दान करें।
अधिक मास के दौरान विवाह, मुंडन, गृहप्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों पर रोक रहती है।
दीपदान का महत्व: घर के मंदिर, तुलसी के पास, गौशाला और पीपल के पेड़ के नीचे दीपदान करने से सौभाग्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
पीपल पूजन: मलमास में रोजाना पीपल की जड़ में जल अर्पित करना और घी का दीपक जलाना विशेष लाभकारी माना गया है, क्योंकि पीपल में भगवान विष्णु का वास होता है।
तुलसी अर्घ्य: जल में दूध मिलाकर रोजाना तुलसी जी को अर्घ्य देने से तनाव दूर होता है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।