1. हिन्दी समाचार
  2. क्षेत्रीय
  3. Video- महिला इलाज कराने सरकारी अस्पताल पहुंची थी, इलाज से पहले छत मौत बनकर गिरी, ​बाल-बाल बची

Video- महिला इलाज कराने सरकारी अस्पताल पहुंची थी, इलाज से पहले छत मौत बनकर गिरी, ​बाल-बाल बची

राजस्थान के चूरू जिले के सुजानगढ़ स्थित राजकीय मातृ एवं शिशु अस्पताल में बुधवार दोपहर बड़ा हादसा टल गया। अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार पर बने बरामदे की जर्जर छत का भारी प्लास्टर अचानक टूटकर नीचे आ गिरा। उसी दौरान वहां से गुजर रही एक महिला इसकी चपेट में आ गई और गंभीर रूप से घायल हो गई...

By Harsh 
Updated Date

Viral-Video: राजस्थान के चूरू जिले के सुजानगढ़ स्थित राजकीय मातृ एवं शिशु अस्पताल में बुधवार दोपहर बड़ा हादसा टल गया। अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार पर बने बरामदे की जर्जर छत का भारी प्लास्टर अचानक टूटकर नीचे आ गिरा। उसी दौरान वहां से गुजर रही एक महिला इसकी चपेट में आ गई और गंभीर रूप से घायल हो गई। पूरी घटना अस्पताल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई। दोपहर करीब 1:18 बजे हुए इस हादसे के बाद अस्पताल में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। मौके पर मौजूद लोगों और सुरक्षा गार्ड ने बिना देर किए घायल महिला को इलाज के लिए अस्पताल के अंदर पहुंचाया जहां डॉक्टरों ने उसका प्राथमिक उपचार किया।

पढ़ें :- प्रतापगढ़ में छत ढह जाने से 6 लोगों की मौत, गर्मी के कारण पूरा परिवार एसी वाले कमरे में सो र​हा था

घायल महिला की पहचान 25 वर्षीय किरण मेघवाल के रूप में हुई है, जो सुजानगढ़ के गुलेरिया गांव की रहने वाली है। बताया जा रहा है कि वह किसी निजी काम से अस्पताल आई थी। जैसे ही वह मुख्य गेट से बाहर निकल रही थी, उसी समय छत का प्लास्टर और सीमेंट का मलबा सीधे उसके सिर पर आ गिरा। चोट लगने से उसके सिर पर गहरा घाव हुआ, जिस पर डॉक्टरों को दो टांके लगाने पड़े। इलाज के बाद महिला को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। जानकारी के अनुसार, वह अस्पताल के पास स्थित एक मेडिकल स्टोर में काम करती है। हादसे के तुरंत बाद एहतियात के तौर पर अस्पताल का मुख्य प्रवेश द्वार बंद कर दिया गया, ताकि कोई अन्य व्यक्ति खतरे वाले हिस्से में न पहुंच सके।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अस्पताल प्रशासन ने हादसे से एक दिन पहले ही भवन की खराब हालत को लेकर लोक निर्माण विभाग (PWD) को लिखित सूचना भेजी थी। पत्र में लगातार बारिश के कारण छतों में आई सीलन और बरामदे समेत कई हिस्सों के जर्जर होने का उल्लेख करते हुए जल्द मरम्मत कराने की मांग की गई थी। बावजूद इसके समय रहते कोई कार्रवाई नहीं हुई और अगले ही दिन हादसा हो गया।

अस्पताल प्रशासन के मुताबिक सिर्फ बरामदा ही नहीं बल्कि रूम नंबर-1, टीकाकरण कक्ष और कई अन्य कमरों की छतें भी खस्ताहाल हैं। रूम नंबर-1 की छत का एक हिस्सा पहले ही गिर चुका है। ऐसे में मरीजों, गर्भवती महिलाओं और अस्पताल कर्मचारियों की सुरक्षा पर लगातार खतरा मंडरा रहा है। यह घटना सरकारी अस्पतालों की बदहाल इमारतों और जिम्मेदार विभागों की लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े करती है। राहत की बात सिर्फ इतनी रही कि हादसे के समय वहां अधिक भीड़ नहीं थी। यदि उसी वक्त बड़ी संख्या में मरीज या गर्भवती महिलाएं मौजूद होतीं, तो यह हादसा कहीं ज्यादा भयावह रूप ले सकता था।

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...