सावन प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित अत्यंत पवित्र और फलदायी व्रत माना जाता है। आज यानी 25 अगस्त को सावन का आखिरी और दूसरा प्रदोष व्रत रखा जा रहा है। पंचांग के अनुसार हर महीने के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है।
Sawan Pradosh Vrat 2026 : सावन प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित अत्यंत पवित्र और फलदायी व्रत माना जाता है। आज यानी 25 अगस्त को सावन का आखिरी और दूसरा प्रदोष व्रत रखा जा रहा है। पंचांग के अनुसार हर महीने के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
मान्यता के अनुसार, प्रदोष काल (सूर्यास्त से पहले और बाद का समय) में भगवान शिव कैलाश पर प्रसन्न मुद्रा में विराजमान होते हैं और देवता उनकी स्तुति करते हैं। इस समय शिव आराधना करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।
प्रदोष में पूजा का महत्व
भगवान शिव का जल, दूध, बेलपत्र और पंचामृत से अभिषेक किया जाता है।
शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करना शुभ माना जाता है।
महामृत्युंजय मंत्र और “ॐ नमः शिवाय” का जाप किया जाता है।
प्रदोष काल में दीपदान और शिव-पार्वती पूजन का विशेष महत्व है।
आध्यात्मिक संदेश
सावन प्रदोष केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि अहंकार, नकारात्मकता और विकारों को त्याग कर शिव तत्व से जुड़ने का पर्व है। भगवान शिव का संदेश है कि संकटों में धैर्य, संयम और लोककल्याण की भावना बनाए रखनी चाहिए।
प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें और अंत में घी के दीपक से भगवान शिव की आरती करें।
दिनभर उपवास रखते हुए मन में शिव का स्मरण करें।