जयराम रमेश ने कहा कि, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने जून 2025 में बिहार में मतदाता सूचियों के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया का पहला चरण शुरू किया था। इसके बाद नवंबर 2025 में 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों (UTS) में इसका दूसरा चरण शुरू किया गया। पहले और दूसरे चरण में 7.8 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। SIR से पहले की मतदाता सूची के अनुपात में देखें तो नाम हटाए जाने की यह दर 13% है। तीसरा चरण 2026 के मध्य में 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू हुआ। चल रहे इस तीसरे चरण में 12 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों के आंकड़े इस प्रकार हैं।
नई दिल्ली। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने चुनाव आयोग और मोदी सरकार पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया पर सवाल उठाया है। साथ ही कहा कि, दो चरणों में 7.8 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। SIR असल में बड़े पैमाने पर मतदाताओं का Shah Instigated Removal है। यह हमारे संविधान पर हमला है।
जयराम रमेश ने कहा कि, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने जून 2025 में बिहार में मतदाता सूचियों के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया का पहला चरण शुरू किया था। इसके बाद नवंबर 2025 में 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों (UTS) में इसका दूसरा चरण शुरू किया गया। पहले और दूसरे चरण में 7.8 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। SIR से पहले की मतदाता सूची के अनुपात में देखें तो नाम हटाए जाने की यह दर 13% है। तीसरा चरण 2026 के मध्य में 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू हुआ। चल रहे इस तीसरे चरण में 12 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों के आंकड़े इस प्रकार हैं।
जयराम रमेश ने कहा कि, कुल 36.06 करोड़ मतदाताओं में से 6.18 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। इस हिसाब से नाम हटाए जाने की दर 17% से अधिक है। इसके अलावा 5.43 करोड़ मतदाताओं को नोटिस जारी कर मतदाता सूची में अपना नाम बनाए रखने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज मांगे गए हैं। इससे और 15% मतदाताओं के नाम हटाए जाने का जोखिम है। यह असामान्य रूप से बहुत बड़ा अनुपात है, जो पूरी SIR प्रक्रिया की ढांचागत खामियों को दिखाता है। इतने बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के बाद भी इतने अधिक अतिरिक्त मतदाता कैसे हो सकते हैं, जिनका अभी भी वेरिफिकेशन’ किया जाना बाकी है?
उन्होंने आगे कहा, इस प्रकार, आश्वर्यजनक रूप से 32% मतदाताओं-यानी लगभग हर तीन में से एक मतदाता का नाम या तो मतदाता सूची से हटा दिया गया है या उस पर नाम हटाए जाने का खतरा है। इस पैमाने पर राज्यवार स्थिति इस प्रकार है: दिल्ली (53.73%), चंडीगढ़ (52.58%), झारखंड (39.57%), उत्तराखंड (35.71%), मेघालय (35.36%), महाराष्ट्र (33.88%), तेलंगाना (48.90%), कर्नाटक (27.6%), हरियाणा (37.5%), ओडिशा (23.67%), आंध्र प्रदेश (21.17%) और पंजाब (15.23%)।
उन्होंने कहा, कर्नाटक, तेलंगाना और झारखंड में जिन मतदाताओं के नाम हटाए जाने का खतरा है, उनकी सूची सार्वजनिक की गई, ताकि वे अपना वेरिफिकेशन पूरा कर सकें। दिल्ली में यह सूची 19 सितंबर 2026 को ही सार्वजनिक की गई और वह भी केवल जनता के दबाव के बाद। BJP शासित अन्य राज्यों के साथ-साथ पंजाब ने अब तक ऐसा नहीं किया है।
इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि अलग-अलग राज्यों में बड़े पैमाने पर जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, उनमें भारी बहुमत हमारे समाज के आर्थिक और सामाजिक रूप से सबसे कमजोर और वंचित वर्गों से आने वाले मतदाताओं का है। अधिकांश बड़े राज्यों में SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से पुरुषों की तुलना में महिलाओं के नाम अधिक हटाए गए हैं। इस SIR के जरिए सरकार ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है और नागरिकों पर ऐसे दस्तावेज पेश करने का बोझ डाल दिया है, जो शायद उन्हें सरकार ने कभी उपलब्ध ही नहीं कराए। जिस कसौटी पर देश के अधिकांश नागरिक खरे ही नहीं उतर सकते, वह वास्तव में लोगों को बाहर करने की एक मशीन भर है। SIR असल में बड़े पैमाने पर मतदाताओं का Shah Instigated Removal है। यह हमारे संविधान पर हमला है।