संसद के मॉनसून सत्र से पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के मुखिया शरद पवार को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने स्टेशन प्रोजेक्ट में कथित घोटाले व गैर-कानूनी कानों की जांच की मांग वाली जनहित याचिका खारिज कर दी है।
नई दिल्ली : संसद के मॉनसून सत्र से पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के मुखिया शरद पवार को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने स्टेशन प्रोजेक्ट में कथित घोटाले व गैर-कानूनी कानों की जांच की मांग वाली जनहित याचिका खारिज कर दी है।
इस मामले में मुख्य रूप से चीफ शरद पवार (Sharad Pawar), सांसद सुप्रिया सुले (Supriya Sule) के अलावा दिवंगत डिप्टी सीएम अजीत पवार (Late Deputy CM Ajit Pawar) का भी नाम था, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के फैसले से पवार परिवार को संजीवनी मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का मतलब है कि अब लवासा घोटाले (Lavasa scam) की जांच नहीं होगी।
सीजेआई सूर्यकांत (CJI Surya Kant) ने याचिकाकर्ता को मंशा पर सवाल खड़े करते हुए इसे खारिज दिया नानासाहेब जाधव ने कहा कि सुको के फैसले से उन्हें धक्का लगा है। इससे हमें बड़ी निराशा हुई है। हम आगे की कार्यवाही को लेकर कानूनी सलाह ले रहे हैं। पवार परिवार को सुप्रीम राहत मिलने पर सुनेत्रा पवार की अगुवाई वाली एनसीपी के महाराष्ट्र कांग्रेस प्रमुख सुनील तटकरे ने प्रतिक्रिया दी है। तटकरे ने कहा कि यह केस मेरिट पर शून्य था। शरद पवार (Sharad Pawar) समेत उनके पूरे परिवार को ऐसे वक्त पर राहत मिली है जब संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने जा रहा है।
सुनील तटकरे बोले-शून्य था केस
चर्चा है कि महिला आरक्षण और लोकसभा के परिसीमन के मुद्दे पर शरद पवार की अगुवाई वाली एनसीपी केंद्र सरकार का समर्थन कर सकती है। मंगलवार को सुप्रिया सुले (Supriya Sule) के इसके संकेत दिए थे, हालांकि उन्हें यह भी जोड़ा था कि वह बिल को देखेंगी और फिर फैसला लेंगी। इसे मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए सुनील तटकरे ने कहा है कि मैं खुद इस मामले में गवाह रहा हूं। मुंबई हाईकोर्ट ने भी इस याचिका को खारिज कर दिया था, क्योकि यह मामला मेरिट पर शून्य था। इस फैसले से साबित हुआ है कि देश की न्याय व्यवस्था कितनी मजबूत है। परियोजना के दौरान जो हुआ। उसे पवार पवार ने अपनी किताब में पहले ही स्पष्ट कर दिया है।