आज शरद पूर्णिमा है शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की रोशनी (चांदनी) में खीर रखने की परंपरा है, क्योंकि माना जाता है कि इस रात चंद्रमा की किरणें अमृत के समान गुणों वाली होती हैं। मान्यताओं के अनुसार इस रात माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं (कोजागरी पूर्णिमा)। उन्हें खीर का भोग लगाने से घर में सुख, शांति और धन-समृद्धि आती है।
Sharad Purnima Kheer : आज शरद पूर्णिमा है शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की रोशनी (चांदनी) में खीर रखने की परंपरा है, क्योंकि माना जाता है कि इस रात चंद्रमा की किरणें अमृत के समान गुणों वाली होती हैं। मान्यताओं के अनुसार इस रात माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं (कोजागरी पूर्णिमा)। उन्हें खीर का भोग लगाने से घर में सुख, शांति और धन-समृद्धि आती है। साथ ही, ब्रज में इसी रात भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों संग महारास रचाया था। ऐसा माना जाता है कि इस खीर को खाने से शरीर को औषधीय गुण और सालभर के लिए उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।
पारंपरिक तरीका
शरद पूर्णिमा की खीर सामान्य खीर से थोड़ी अलग और पवित्र मानी जाती है। इसे बनाते समय इन नियमों का ध्यान रखें:
सामग्री
इस खीर को बनाने के लिए गाय के शुद्ध दूध और साबुत चावल का उपयोग करना चाहिए (टूटे या सेला चावल का उपयोग न करें)।
मीठा
चीनी की जगह मिश्री या खांड का उपयोग करना सेहत और परंपरा के लिहाज से बहुत उत्तम होता है। इसमें औषधीय गुण बढ़ाने के लिए खसखस भी डाला जाता है।
बर्तन और ढकने का तरीका
खीर को कांच, मिट्टी या चांदी के बर्तन में रखें। खुले आसमान के नीचे रखते समय इसे पूरी तरह खुला न छोड़ें, बल्कि एक मलमल या साफ सूती हल्के कपड़े से ढकें ताकि धूल-मिट्टी या कीड़े न गिरें और चांद की किरणें सीधे खीर तक पहुंच सकें।
खीर निकालने (प्रसाद लेने) का समय
अगले दिन यानी 26 अक्टूबर 2026 को सुबह 5:09 बजे से 8:09 बजे के बीच खीर को उठाकर भगवान को भोग लगाने के बाद प्रसाद के रूप में ग्रहण करना बेहद शुभ माना गया है।