1. हिन्दी समाचार
  2. दिल्ली
  3. भोजशाला परिसर में नमाज पर सुप्रीम कोर्ट की रोक जारी, राज्य सरकार को परिसर के पास नई जगह देने का निर्देश

भोजशाला परिसर में नमाज पर सुप्रीम कोर्ट की रोक जारी, राज्य सरकार को परिसर के पास नई जगह देने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने भोजशाला मामले पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) के फैसले के खिलाफ विभिन्न मुस्लिम पक्षों के तरफ से दायर याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत (Chief Justice Surya Kant) , जस्टिस जॉयमाल्या बागची (Justice Joymalya Bagchi) और जस्टिस वी मोहना (Justice V. Mohana) की पीठ ने याचिकाओं पर फिलहाल कोई अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया।

By santosh singh 
Updated Date

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने भोजशाला मामले पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) के फैसले के खिलाफ विभिन्न मुस्लिम पक्षों के तरफ से दायर याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत (Chief Justice Surya Kant) , जस्टिस जॉयमाल्या बागची (Justice Joymalya Bagchi) और जस्टिस वी मोहना (Justice V. Mohana) की पीठ ने याचिकाओं पर फिलहाल कोई अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया। साथ ही हाईकोर्ट के फैसले से पूर्व की स्थिति बहाल करने से इनकार कर दिया। जिसके चलते अभी भोजशाला परिसर में नमाज पर रोक जारी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने केंद्र सरकार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI), हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस तथा अन्य हिंदू पक्षकारों को नोटिस जारी किया।

पढ़ें :- जब मैं छात्रों की बात सुनने के लिए प्रयागराज आने का फैसला किया, तब से प्रशासन मेरे कार्यक्रम को रोकने की कर रहा कोशिश: राहुल गांधी

अदालत ने क्या दिया निर्देश?

पीठ ने हालांकि राज्य सरकार को निर्देश दिया कि मुस्लिम पक्ष को भोजशाला के पास ही अलग जगह दी जाए, जहां मुस्लिम शुक्रवार को दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच नमाज अदा कर सकें। पीठ ने साफ किया कि अंतिम फैसले तक यह निर्देश अस्थायी है। मुस्लिम पक्ष के वकील हुजैफा अहमदी की याचिका को स्वीकार करते हुए पीठ ने निर्देश दिया कि एएसआई (ASI), बिना अदालत की मंजूरी के भोजशाला परिसर में ढांचागत बदलाव नहीं करेगा।

मुस्लिम पक्ष ने दी ये दलीलें

अदालत ने यह भी कहा कि मामले को अंतिम सुनवाई के लिए शीघ्र सूचीबद्ध किया जाएगा। पीठ ने कहा कि वे इस मामले पर जुलाई के तीसरे हफ्ते में अंतिम सुनवाई कर सकते हैं। सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष के वकील हुजैफा अहमदी ने कहा कि हाईकोर्ट ने उन्हें सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)  में अपील का मौका भी नहीं दिया। साल 2003 में एएसआई (ASI) ने आदेश दिया था कि हफ्ते में एक दिन शुक्रवार को नमाज अदा की जाएगी और एक दिन मंगलवार को पूजा होगी। आज हमें पूरी तरह से बाहर कर दिया गया है? ये बहुत गलत है।

पढ़ें :- Video-बेगूसराय में युवक का पैर टूटा तो प्लास्टर की जगह बांध दिया कार्टन, कांग्रेस बोली-ये है बिहार के 'डबल इंजन' सरकार की शर्मनाक तस्वीर

मुस्लिम पक्ष के वकील ने कहा कि एएसआई की रिपोर्ट करने वाले लोगों से पूछताछ भी नहीं की गई। हुजैफा ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक की मांग की। वरिष्ठ वकील सिंघवी ने कहा कि कुछ जगहों पर मंदिर हो सकते हैं, लेकिन इतिहास में पीछे जाने की जरूरत नहीं है। सिंघवी ने कहा, यहां 700 वर्षों से यहां नमाज हो रही है। 1927 -28 के सर्वे में कहा गया कि ये एक मस्जिद है। एमपी वक्फ एक्ट (MP Waqf Act) का नोटिफिकेशन भी यही कहता है। साल 1977 से यहां नमाज के साथ बसंत पंचमी की पूजा भी हो रही है, लेकिन हिंदू पक्ष की रिट याचिका पर आदेश पारित कर दिया गया।

सॉलिसिटर जनरल ने क्या कहा?

इस पर सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता (Solicitor General Tushar Mehta) ने भोजशाला परिसर (Bhojshala Complex) में नमाज का विरोध किया और कहा कि आदेश को दिए हुए दो महीने बीत चुके हैं। काफी कुछ हो चुका है। अगर फिर से नमाज का निर्देश दिया जाता है तो इससे प्रशासनिक परेशानी हो सकती है।

ये बेहद संवेदनशील मुद्दा, सोच-समझकर आगे बढ़ने की जरूरत : सीजेआई

सीजेआई सूर्यकांत (CJI Surya Kant) ने कहा कि ये बहुत संवेदनशील मुद्दा है। इसमें बहुत सोच समझ कर आगे बढ़ने और टिप्पणी करने की जरूरत है, वर्ना जनता में गलत संदेश जाएगा और गलत प्रभाव पड़ेगा। बेहतर होगा कि हम इसे अगले 10-20 दिनों के भीतर एक सुविधाजनक तारीख पर सुनवाई के लिए तय करते हैं।

पढ़ें :- माफिया अतीक के छोटे बेटे अबान वायरल रील पर दर्ज हुई थी पहली FIR , बोला था-'हम कुत्तों की तरह पीछे वार नहीं करते...'

सीजेआई (CJI) ने कहा कि हमें बहुत ज्यादा सावधान रहना चाहिए। ऐसा ऑर्डर पास नहीं करना चाहिए जिसका प्रभाव लॉ एंड ऑर्डर पर पड़े। एएसआई (ASI) के इंतजाम करने के बावजूद, वहां पर दिक्कतें रही हैं। यह एक ऐसा मामला है जहां दोनों पक्षों को धैर्य रखना चाहिए। इसमें दो से तीन सप्ताह लग सकते हैं। सभी को तैयार रहना चाहिए। बता दें कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court)  की इंदौर बेंच ने 15 मई 2026 को धार के ऐतिहासिक भोजशाला परिसर (Bhojshala Complex) को मां वाग्देवी (सरस्वती) का प्राचीन मंदिर घोषित करते हुए हिंदू पक्ष में फैसला सुनाया था।

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...