यह मामला उस समय सामने आया था जब टीसीएस की कुछ महिला कर्मचारियों ने कंपनी के भीतर मानसिक उत्पीड़न, धार्मिक दबाव और यौन शोषण जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। जांच के बाद पुलिस ने नौ एफआईआर दर्ज की थीं और अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच एजेंसियों का दावा है कि कंपनी के भीतर एक समूह बनाकर संगठित तरीके से गैरकानूनी गतिविधियां चलाई जा रही थीं..
TCS मतांतरण केस: महाराष्ट्र में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की नासिक यूनिट से जुड़े महिला उत्पीड़न और कथित मतांतरण मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। कई दिनों से फरार चल रही आरोपी निदा खान को गुरुवार को छत्रपति संभाजीनगर से गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी नासिक पुलिस की विशेष जांच टीम और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में हुई।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार नासिक पुलिस कमिश्नर संदीप कर्णिक ने बताया कि आरोपी प्राथमिकी दर्ज होने के बाद लगातार ठिकाने बदल रही थी। उसकी तलाश में पुलिस महाराष्ट्र के अलग-अलग शहरों में छापेमारी कर रही थी। आखिरकार तकनीकी निगरानी और स्थानीय इनपुट के आधार पर पुलिस ने उसे दबोच लिया।
यह मामला उस समय सामने आया था जब टीसीएस की कुछ महिला कर्मचारियों ने कंपनी के भीतर मानसिक उत्पीड़न, धार्मिक दबाव और यौन शोषण जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। जांच के बाद पुलिस ने नौ एफआईआर दर्ज की थीं और अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच एजेंसियों का दावा है कि कंपनी के भीतर एक समूह बनाकर संगठित तरीके से गैरकानूनी गतिविधियां चलाई जा रही थीं।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जुलाई 2022 से फरवरी 2026 के बीच पीड़िता पर धार्मिक दबाव बनाया गया। उसे कथित तौर पर एक विशेष धर्म को अपनाने के लिए मानसिक रूप से परेशान किया गया और उसकी आस्था से जुड़े देवी-देवताओं के खिलाफ आपत्तिजनक बातें कही गईं। आरोप यह भी है कि महिला कर्मचारियों पर इस्लामी परंपराओं के मुताबिक कपड़े पहनने और व्यवहार करने का दबाव बनाया जाता था।
गिरफ्तारी से पहले निदा खान ने नासिक कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल कर राहत मांगी थी। उसने कोर्ट को बताया था कि वह दो महीने की गर्भवती है, लेकिन अदालत ने उसे अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। इसमें यौन उत्पीड़न, मानहानि, धार्मिक भावनाएं आहत करने और मानसिक प्रताड़ना से जुड़े आरोप शामिल हैं। चूंकि शिकायतकर्ता अनुसूचित जाति से है, इसलिए मामले में SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी लगाई गई हैं।