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E20 जनता पार्टी का सोशल मीडिया कैंपेन शुरू, अब केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मांगा इस्तीफा, जुड़े हजारों लोग

नीट परीक्षा पेपर लीक (NEET Exam Paper Leak) और सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (Chief Justice Surya Kant) के बयान के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का गठन हुआ। इसके बाद जंतर-मंतर पर सीजेपी (CJP) समर्थकों की तरफ से प्रदर्शन शुरू किया गया, जो एक महीने से ज्यादा वक्त तक चला। छात्रों व विपक्ष के प्रदर्शन के आगे झुकते हुए आखिरकार 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Union Education Minister Dharmendra Pradhan) ने अपना इस्तीफा सौंप दिया।

By santosh singh 
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नई दिल्ली। अभी एक आंदोलन की गूंज थमी भी नहीं थी कि दूसरा शुरू हो गया। लगता है सरकार के सामने सवालों का सिलसिला थमने वाला नहीं है। नीट परीक्षा पेपर लीक (NEET Exam Paper Leak) और सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (Chief Justice Surya Kant) के बयान के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का गठन हुआ। इसके बाद जंतर-मंतर पर सीजेपी (CJP) समर्थकों की तरफ से प्रदर्शन शुरू किया गया, जो एक महीने से ज्यादा वक्त तक चला। छात्रों व विपक्ष के प्रदर्शन के आगे झुकते हुए आखिरकार 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Union Education Minister Dharmendra Pradhan) ने अपना इस्तीफा सौंप दिया। इसके बाद केंद्र सरकार के सीजेपी (CJP) की बाकी मांगों को माने जानें के बाद इस प्रदर्शन को खत्म करने की घोषणा की गई। इसके बाद अब एक नया सोशल मीडिया कैंपेन ने सुर्खियां बटोर रहा है।

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कैंपेन से सोशल मीडिया पर हजारों लोग जुड़े

ई-20 जनता पार्टी (E20 Janata Party) के नाम से बने इस कैंपेन के सोशल मीडिया एक्स पर 32.3 हजार से ज्यादा फॉलोवर्स हैं, जबकि इंस्टाग्राम पर ये आंकड़ा अभी 1137 हो गया है। एक्स पर पार्टी के एक पोस्ट में लिखा गया- क्या हम सिर्फ ईंधन इस्तेमाल करने वाले लोग हैं, या हम जागरूक नागरिक हैं जिन्हें सवाल पूछने का अधिकार है? इथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर पूरे देश में बड़े पैमाने पर चर्चा हो रही है और अलग-अलग दावे और नजरिए सामने आ रहे हैं। ऐसे में, हर नागरिक और हर गाड़ी मालिक को साफ, पारदर्शी और सबूतों पर आधारित जानकारी मिलनी चाहिए।

पोस्ट में आगे लिखा गया- किसी सरकारी नीति के बारे में सवाल पूछने का मतलब उसका विरोध करना नहीं है। लोकतंत्र में सवाल पूछना एक बुनियादी अधिकार है और यह एक जागरूक समाज की निशानी है। अगर कोई नीति सच में जनहित में है, तो उसे जनता की पड़ताल पर खरा उतरना चाहिए, और हर जायज सवाल का जवाब तथ्यों, पारदर्शिता और वैज्ञानिक सबूतों के साथ दिया जाना चाहिए। आइए, हम अपनी राय जानकारी और सबूतों के आधार पर बनाएं – न कि अंदाजों या भावनाओं के आधार पर। जानकारी रखें। सवाल पूछें। जवाब मांगें। यही हर जागरूक नागरिक की जिम्मेदारी है।

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केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का मांगा इस्तीफा

वहीं, कई अन्य पोस्ट में केंद्रीय सड़क-परिवहन मंत्री नितिन गडकरी (Union Minister for Road Transport Nitin Gadkari) के इस्तीफे की मांग की गई है। जनता से इस आंदोलन को देश के कोने-कोने तक पहुंचाने की अपील की गई है। एक दूसरे पोस्ट में लिखा गया कि यह किसी पार्टी की नहीं, जनहित की बात है। आओ मिलकर आवाज उठाये, एथनॉल नीति पर सरकार से सवाल करें।

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