शारदीय नवरात्र की घूम पूरे देश में मची हुई है। भक्त अपने निकट मां दुर्गा के पूजा पंड़ालो तक जा कर मां दुर्गा के दर्शन पूजन कर रहें है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ के बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी की डोली शारदीय नवरात्र की अष्टमी तिथि पर पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ जगदलपुर के लिए रवाना हुई।
Maa Danteshwari Ki Doli : शारदीय नवरात्र की घूम पूरे देश में मची हुई है। भक्त अपने निकट मां दुर्गा के पूजा पंड़ालो तक जा कर मां दुर्गा के दर्शन पूजन कर रहें है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ के बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी की डोली शारदीय नवरात्र की अष्टमी तिथि पर पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ जगदलपुर के लिए रवाना हुई। ऐतिहासिक बस्तर दशहरा में शामिल होने जा रही माता की डोली के दर्शन के लिए मंदिर परिसर में हजारों श्रद्धालु पहुंचे। डोली रवाना होने से पहले विशेष पूजा-अर्चना की गई। इसी के साथ 618 साल पुरानी परंपरा के निर्वहन के साथ ही बस्तर में दशहरा पर्व का मुख्य चरण शुरू हो गया है।
जिया परिवार और पुजारियों ने मां दंतेश्वरी की डोली को कंधे पर उठाया। डोली के दर्शन के लिए दंतेवाड़ा के डंकिनी पुल तक श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। बड़ी संख्या में लोग सड़क के दोनों किनारों पर खड़े होकर जयकारे लगाते दिखे। पुलिस जवानों की ओर से गॉड ऑफ ऑनर देकर सलामी देना भी इस धार्मिक आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहा।
बस्तर दशहरा की परंपरा के अनुसार, शारदीय नवरात्र की पंचमी तिथि को बस्तर राजपरिवार के सदस्य कमलचंद भंजदेव (Kamalchand Bhanjdeo) अपने परिजनों के साथ मां दंतेश्वरी मंदिर पहुंचे थे। यहां उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और माता को जगदलपुर में आयोजित होने वाले ऐतिहासिक बस्तर दशहरा (Historic Bastar Dussehra) में शामिल होने का निमंत्रण दिया था।