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UP Nikay Chunav : इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

यूपी निकाय चुनाव (UP Nikay Chunav) पर इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) के फैसले पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने रोक लगा दी है। कोर्ट ने निकाय चुनाव को तीन महीने देर से कराने की अनुमति दी है। इस बीच जल्द ही वित्तीय दायित्वों को लेकर अधिसूचना जारी हो सकती है।

By संतोष सिंह 
Updated Date

नई दिल्ली। यूपी निकाय चुनाव (UP Nikay Chunav) पर इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) के फैसले पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने रोक लगा दी है। कोर्ट ने निकाय चुनाव को तीन महीने देर से कराने की अनुमति दी है। इस बीच जल्द ही वित्तीय दायित्वों को लेकर अधिसूचना जारी हो सकती है। कोर्ट ने कहा कि इस दौरान कोई भी बड़ी नीतिगत फैसला नहीं लिया जा सकता है। आयोग तीन महीने के अंदर अपना काम पूरा करने की कोशिश करे।

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इससे पहले स्थानीय निकाय चुनाव (Local Body Elections)मामले में उत्तर प्रदेश सरकार की याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) सहमत हो गया था। मामले चार जनवरी को सुनवाई तय की गई थी। दरअसल, शहरी स्थानीय निकाय चुनावों (Local Body Elections) की अधिसूचना रद्द करने के हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)  का रुख किया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने अपने आदेश में निकाय चुनावों (Nikay Chunav) पर सरकार की मसौदा अधिसूचना को रद्द कर दिया गया था।

राज्य सरकार ने दी थी यह दलील

राज्य सरकार ने अपनी याचिका में कहा था कि उच्च न्यायालय पांच दिसंबर की मसौदा अधिसूचना को रद्द नहीं कर सकता है, जो अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों के अलावा अन्य पिछड़े वर्गों (OBC) के लिए शहरी निकाय चुनावों में सीटों के आरक्षण का प्रावधान करता है। एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड रुचिरा गोयल के माध्यम से दायर अपील में कहा गया था कि ओबीसी (OBC) संवैधानिक रूप से संरक्षित वर्ग है और हाईकोर्ट  ने मसौदा अधिसूचना को रद्द करने में गलती की है। दरअसल, उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी को आरक्षण प्रदान करने के लिए सभी मुद्दों पर विचार करने के लिए पांच सदस्यीय आयोग नियुक्त किया है।

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जानें क्या है पूरा मामला?
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार (Yogi Government)ने पांच दिसंबर को निकाय चुनाव के लिए आरक्षण की अधिसूचना जारी की थी। इसके इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। कहा गया कि यूपी सरकार (UP Government) ने आरक्षण तय करने में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के ट्रिपल टेस्ट फॉर्मूले का पालन नहीं किया है। इस पर हाईकोर्ट ने आरक्षण की अधिसूचना रद्द करते हुए यूपी सरकार (UP Government) को तत्काल प्रभाव से बिना ओबीसी आरक्षण (OBC Reservation) लागू किए नगर निकाय चुनाव कराने का फैसला दे दिया था।

 

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