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परिवार कल्याण निदेशालय के महानिदेशक एवं वित्त नियंत्रक का कारनामा, निर्माण कार्य के बजट को दूसरे मद में बांटा, डिप्टी सीएम ने मांगी रिपोर्ट

परिवार कल्याण निदेशालय में बजट आवंटन में बड़ा खेल किया गया है। इसको लेकर विभिन्न जनप्रतिनिधियों की ओर से डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक से शिकायत की गई। शिकायत में कहा गया कि, परिवार कल्याण निदेशालय के महानिदेशक एवं वित्त नियंत्रक द्वारा निर्माण कार्य के लिए स्वीकृत बजट को शासन में सक्षम स्तर से अनुमोदन लिए बिना दवाओं और उपकरणों की खरीद के लिए विभिन्न जनपदों में वितरित कर दिया गया।

By टीम पर्दाफाश 
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश परिवार कल्याण निदेशालय के महानिदेशक एवं वित्त नियंत्रक ने चेहतो को फायदा पहुंचाने के लिए बड़ा खेल किया है। अब उनका ये खेल उजागर हो गया है, जिसके बाद डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने जांच बैठा दी है। दरअसल, महानिदेशक एवं वित्त नियंत्रक ने निर्माण कार्य के बजट को बिना शासन के अनुमोदन लिए दवाओं और उपकरणों की खरीद के लिए वितरित कर दिया। जब इस मामले का खुलासा हुआ तो महानिदेशक एवं वित्त नियंत्रक की कलई खुल गई, जिसके बाद डिप्टी सीएम ने सात दिनों में मामले की जांच रिपोर्ट मांगी है।

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दरअसल, परिवार कल्याण निदेशालय में बजट आवंटन में बड़ा खेल किया गया है। इसको लेकर विभिन्न जनप्रतिनिधियों की ओर से डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक से शिकायत की गई। शिकायत में कहा गया कि, परिवार कल्याण निदेशालय के महानिदेशक एवं वित्त नियंत्रक द्वारा निर्माण कार्य के लिए स्वीकृत बजट को शासन में सक्षम स्तर से अनुमोदन लिए बिना दवाओं और उपकरणों की खरीद के लिए विभिन्न जनपदों में वितरित कर दिया गया।

साथ ही, अतिरिक्त दवाओं एवं उपकरणों के क्रय हेतु स्वीकृत बजट को विभिन्न जनपदों में अनियमित रूप से छोटे बड़े जनपदों एवं आवश्यकता का परीक्षण किये बिना आवंटित कर वितरित कर दिया गया है। डिप्टी सीएम ने इसको लेकर चिकित्सा स्वास्थ्य एवं ​परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखा है।

डिप्टी सीएम ने पत्र ​में लिखा कि, यदि मनमाने तरीके से बजट का वितरण किया गया है तो यह एक अत्यन्त गम्भीर वित्तीय अनियमितता है। चूंकि परिवार कल्याण निदेशालय द्वारा भारत सरकार की कई जनोपयोगी योजनाओं का भी संचालन किया जाता है और मामला सीधे आम जनमानस से जुड़ा हुआ है। वहां पर ऐसी वित्तीय अनियमितता होना सीधे विभाग एवं सरकार की छवि पर प्रश्नचिन्ह लगाता है।

विभाग के अपर मुख्य सचिव को निर्देश देते हुए डिप्टी सीएम ने कहा कि, जिस मद में बजट स्वीकृत हुआ है उसी मद में उसका आवंटन / व्यय किया जाये और आवश्यकता होने पर शासन / सक्षम स्तर से अनुमोदन के बाद ही अन्य मद में व्यय किया जाये। साथ ही परिवार कल्याण निदेशालय द्वारा किये गये बजट आवंटन की जॉच 03 सदस्यों की समिति बनाकर करायी जाये। पूरे प्रकरण की जांच समयबद्ध रूप से 01 सप्ताह के अन्दर आख्या सहित प्रस्तुत की जाये। उठाये गये बिन्दु सही पाये जाने पर दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कार्यवाही का प्रस्ताव भी प्रस्तुत किया जाये। वहीं, इसको लेकर विशेष सचिव रवि रंजन ने परिवार कल्याण के महानिदेशक को पत्र लिखा है। उन्होंने इन सभी आरोपों पर सम्बन्धित समस्त सूचनायें अपनी संस्तुति सहित अनिवार्यतः दो कार्य दिवस में शासन को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।

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डीजी हेल्थ की भी हुई शिकायत
यही नहीं, डीजी हेल्थ ने भी बजट के आवंटन में भारी अनियमितता की है। डिप्टी सीएम के पास भी इसकी शिकायत पहुंची है और जल्द ही इसकी भी जांच हो सकती है।

 

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