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प्रधानों को प्रशासक बनाने के फैसले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाई रोक,अब अगली सुनवाई 13 जुलाई को

यूपी में प्रधानों को प्रशासक बनाने के फैसले पर शुक्रवार को योगी सरकार (Yogi Government) के फैसले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने रोक लगा दी है। बता दें कि अरविंद राठौर की याचिका पर हाईकोर्ट का फैसला, कार्यकाल खत्म होने पर प्रधान प्रशासक बनाए गए थे।

By santosh singh 
Updated Date

प्रयागराज। यूपी में प्रधानों को प्रशासक बनाने के फैसले पर शुक्रवार को योगी सरकार (Yogi Government) के फैसले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने रोक लगा दी है। बता दें कि अरविंद राठौर की याचिका पर हाईकोर्ट का फैसला, कार्यकाल खत्म होने पर प्रधान प्रशासक बनाए गए थे। कार्यकाल खत्म होने पर प्रधान प्रशासक बनाए गए थे। अब इस मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट  (Allahabad High Court)  ने इस मामले में सरकार के फैसले को असंवैधानिक बताया है। यह आदेश अरविंद राठौर की याचिका में कार्यकाल खत्म होने के बाद प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के फैसले को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद प्रदेश में पंचायतों के प्रशासनिक संचालन को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। कोर्ट के इस अंतरिम आदेश के बाद प्रदेश की पंचायत व्यवस्था और आगामी पंचायत चुनावों को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

क्या है पूरा मामला?

यूपी में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। ऐसे में पंचायतों के नियमित संचालन को बनाए रखने के लिए सरकार ने पूर्व प्रधानों को ही प्रशासक बनाए जाने का फैसला लिया था। सरकार का तर्क था कि नए पंचायत चुनाव होने तक प्रशासनिक कार्य बाधित न हों, इसलिए यह व्यवस्था लागू की गई। लेकिन इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई, जिसमें इसकी वैधानिकता पर सवाल उठाए गए। सुनवाई के बाद अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश दिया है।

पंचायत चुनाव पर क्या होगा प्रभाव ?

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हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की तैयारियों और पंचायतों के प्रशासनिक संचालन पर असर पड़ सकता है। अब सरकार को अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखना होगा, जिसके बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि पंचायतों के प्रशासनिक कार्यों का संचालन किस व्यवस्था के तहत होगा। इस संबंध में राज्य सरकार की अगली कार्रवाई और अदालत के अंतिम आदेश पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

तो आगे क्या?

मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है। हाईकोर्ट में अगली सुनवाई के दौरान राज्य सरकार अपना पक्ष रखेगी, जिसके बाद यह तय होगा कि प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने का फैसला बरकरार रहेगा या नहीं। फिलहाल अदालत के अंतरिम आदेश के चलते सरकार का निर्णय प्रभावी नहीं रहेगा। वहीं पंचायत चुनाव को लेकर भी राजनीतिक दलों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की नजरें अब इस मामले पर टिकी हुई हैं। बता दे, यह मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में है। हाईकोर्ट की विस्तृत आदेश प्रति और अगली सुनवाई के बाद स्थिति और अधिक स्पष्ट होगी।

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