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बरेली सिटी मजिस्ट्रेट बरेली अलंकार अग्निहोत्री ने UGC और शंकराचार्य मामले को लेकर दिया इस्तीफ़ा

यूपी के बरेली जिले (Bareilly District) में तैनात सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री (City Magistrate Alankar Agnihotri) ने पद त्याग पत्र दे दिया। राज्यपाल को पत्र लिखकर कहा कि यूजीसी Regulations 2026 के विरोध में एवं प्रयागराज में माघ मेले में ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज (Jyotish Peeth Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand Saraswati Maharaj) के ब्राह्मण बटुक शिष्यों की चोटी व शिखा पकड़ कर हुई मारपीट के विरोध में तत्काल प्रभाव से अपने पद से इस्तीफा दे रहा हूं।

By santosh singh 
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बरेली । यूपी के बरेली जिले (Bareilly District) में तैनात सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री (City Magistrate Alankar Agnihotri) ने पद त्याग पत्र दे दिया। राज्यपाल को पत्र लिखकर कहा कि यूजीसी Regulations 2026 के विरोध में एवं प्रयागराज में माघ मेले में ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज (Jyotish Peeth Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand Saraswati Maharaj) के ब्राह्मण बटुक शिष्यों की चोटी व शिखा पकड़ कर हुई मारपीट के विरोध में तत्काल प्रभाव से अपने पद से इस्तीफा दे रहा हूं।

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सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री की एक तस्वीर सोमवार को सोशल मीडिया पर सामने आई है, जिसमें वह पोस्टर लेकर खड़े दिखाई दे रहे हैं। पोस्टर में लिखा है कि हैशटैग यूजीसी रोल बैक…, काला कानून वापस लो। शंकराचार्य और संतों को यह अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान। भाजपा विरोधी नारा भी लिखा है।  ब्राह्मण समुदाय से आने वाले अलंकार अग्निहोत्री 2019 में PCS अफसर बने थे। उनकी 15वीं रैंक आई थी। 10 साल आईटी सेक्टर में काम करने के बाद एग्जाम क्वालीफाई किया था।

मैं शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी के शिष्यों के साथ प्रशासन द्वारा की गई मारपीट और भारत सरकार के नए कानून UGC 2026 से दुखी होकर सिटी मजिस्ट्रेट के पद से इस्तीफा दे रहा हूं। मेरा नाम अलंकार अग्निहोत्री है। मैं 2019 बैच का पीसीएस अधिकारी हूं। अभी बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात हूं।

मैं यह भी बताना चाहता हूं कि मैंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के IIT-BHU से बीटेक किया है। इसके लिए मैं हमेशा महामना मदन मोहन मालवीय का आभारी रहूंगा। उन्होंने जिन आदर्शों पर BHU की स्थापना की, उन्हीं से प्रेरणा लेकर मैं आगे बढ़ा हूं। इस साल प्रयागराज के माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य बटुक ब्राह्मणों के साथ प्रशासन ने मारपीट की। बुजुर्ग आचार्यों को भी पीटा गया, बटुक ब्राह्मणों को जमीन पर गिराकर उनकी चोटी पकड़कर घसीटा गया। यह उनकी इज्जत का अपमान है।

चोटी और शिखा ब्राह्मणों और साधु-संतों की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान होती है। मैं खुद भी ब्राह्मण हूं। इस घटना से साफ है कि प्रशासन ने ब्राह्मणों का अपमान किया है। यह बहुत गलत और गंभीर बात है। ऐसी घटना किसी भी साधारण ब्राह्मण को अंदर से हिला देती है।

इससे ऐसा लगता है कि प्रशासन और मौजूदा सरकार ब्राह्मणों और साधु-संतों के खिलाफ सोच के साथ काम कर रहे हैं। उनकी इज्जत के साथ खिलवाड़ हो रहा है। 13 जनवरी 2026 को यूजीसी ने एक नया नियम जारी किया।

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इसमें बड़े ही कूटनीतिक तरीके से सामान्य वर्ग के छात्रों को स्वघोषित अपराधी माना गया है। इससे सामान्य वर्ग के छात्र, जैसे ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, कायस्थ, भूमिहार आदि, प्रभावित हो सकते हैं। यह छात्रों के प्रति विषमतापूर्ण गतिविधियों और षड्यंत्रों को जन्म देगी।

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