अभिनेत्री सोनल चौहान ने गुरुवार को महिला आरक्षण बिल का समर्थन करते हुए इसे सरकार की ओर से एक अहम पहल बताया। जन्नत फिल्म की एक्ट्रेस सोनल ने उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती में हिस्सा लिया। सफेद सूट पहने सोनल ने इस पवित्र मंदिर में पूजा-अर्चना की और भगवान शिव से प्रार्थना की।
मुंबई। अभिनेत्री सोनल चौहान ने गुरुवार को महिला आरक्षण बिल का समर्थन करते हुए इसे सरकार की ओर से एक अहम पहल बताया। जन्नत फिल्म की एक्ट्रेस सोनल ने उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती में हिस्सा लिया। सफेद सूट पहने सोनल ने इस पवित्र मंदिर में पूजा-अर्चना की और भगवान शिव से प्रार्थना की। मंदिर दर्शन के बाद एक्ट्रेस मैं इस प्रस्तावित कानून इसका समर्थन करती हूं। हमारा देश तरक्की कर रहा है और मुझे यह देखकर बहुत खुशी होती है कि महिलाएं भी इसमें अहम भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि मेरा मानना है कि महिलाएं बहुत शक्तिशाली होती हैं और मुझे बहुत खुशी है कि ऐसी एक अहम पहल की जा रही है।
अभिनेत्री सोनल चौहान की यह टिप्पणी उस समय सामने आई है, जब संसद के विशेष सत्र शुरू होने वाला हे। इस सत्र में महिला आरक्षण बिल पर खास तौर पर चर्चा होने की उम्मीद है। केंद्र सरकार का संसद का विशेष सत्र 16 से 18 अप्रैल तक होना तय है। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सत्र को एक अहम मौका बताते हुए कहा था कि भारत महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए बताया कि आज से शुरू हो रहे संसद के विशेष सत्र में हमारा देश महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाने के लिए पूरी तरह तैयार है। हमारी माताओं और बहनों का सम्मान ही देश का सम्मान है और इसी भावना के साथ हम इस दिशा में पूरी दृढ़ता से आगे बढ़ रहे हैं। हालांकि इस प्रस्ताव की विपक्ष की ओर से आलोचना भी हुई है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस महिलाओं के लिए आरक्षण का समर्थन करते हुए भी सरकार को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), दलित और आदिवासी समुदायों के प्रतिनिधित्व का हिस्सा चुराने नहीं देगी। उन्होंने NDA के इस कदम को राष्ट्र-विरोधी बताया। एक्स पर एक पोस्ट में राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस बिना किसी शर्त के महिलाओं के लिए आरक्षण का समर्थन करती है, लेकिन सरकार को परिसीमन केवल 2026 की जनगणना के आधार पर ही करना चाहिए, जो अभी चल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा कोई भी कानून लाने से पहले जातिगत जनगणना के आंकड़ों पर भी विचार किया जाना चाहिए।