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भोजपुरी स्टार निरहुआ ने राज-उद्धव ठाकरे को किया चैलेंज, बोले-मैं मराठी नहीं बोलता, किसी में दम हो तो…

भोजपुरी एक्टर और बीजेपी नेता दिनेश लाल यादव (Dinesh Lal Yadav) उर्फ निरहुआ (Nirahua) ने एंट्री मारी है। मनसे नेता राज ठाकरे (Raj Thackeray)  और शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) को निरहुआ ने चैलेंज देते हुए कहा कि मैं मराठी नहीं बोलता, किसी में दम हो तो महाराष्ट्र (Maharashtra)  से निकालकर दिखाओ।

By santosh singh 
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Hindi-Marathi Row : महाराष्ट्र (Maharashtra) में हिंदी-मराठी (Hindi-Marathi) विवाद जारी है। इसी बीच भोजपुरी एक्टर और बीजेपी नेता दिनेश लाल यादव (Dinesh Lal Yadav) उर्फ निरहुआ (Nirahua) ने एंट्री मारी है। मनसे नेता राज ठाकरे (Raj Thackeray)  और शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) को निरहुआ ने चैलेंज देते हुए कहा कि मैं मराठी नहीं बोलता, किसी में दम हो तो महाराष्ट्र (Maharashtra)  से निकालकर दिखाओ।

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बता दें कि महाराष्ट्र (Maharashtra)  में इन दनों मराठी भाषा (Marathi Language) को लेकर खूब हो विवाद हो रहा है। दरअसल 20 साल बाद उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) और राज ठाकरे (Raj Thackeray) ने सारे गिले शिकवे भुलाकर मेल-मिलाप कर लिया है। इसके बाद राज्य में सिर्फ मराठी बोलने को लेकर विवाद शुरू हो गया है। एमएनएस के कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर खूब ड्रामा कर रहे हैं। मराठी नहीं बोलने वालों के साथ मारपीट की कई घटनाएं भी सामने आ चुकी है।

हिंदी-मराठी विवाद में अब भोजपुरी एक्टर-सिंगर और पॉलिटिशियन दिनेश लाल यादव उर्फ ‘निरहुआ’ भी कूद पड़े हैं। उन्होंने मराठी भाषा विवाद पर महाराष्ट्र के ठाकरे चचेरे भाइयों को खुली चुनौती देकर विवाद खड़ा कर दिया। यादव ने एक कड़े बयान में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) और शिवसेना (UBT) को चुनौती दी कि वे मराठी के बजाय भोजपुरी में बोलने के लिए उन्हें महाराष्ट्र से बाहर निकालने की कोशिश करें।

न्यूज एजेंसी से बातचीत में निरहुआ ने कहा कि मुझे लगता है ये जो लोग भी करते हैं गंदी राजनीति है। देश में कहीं नहीं होना चाहिए। यह देश अपनी विविध भाषाओं और संस्कृतियों के लिए जाना जाता है, फिर भी यह इस विविधता के बीच एकता बनाए रखता है। यही तो हमारे देश की खासियत है। मुझे लगता है कि इस तरह की गंदी राजनीति करने वाले लोगों को ऐसा करने से बचना चाहिए और संभल जाना चाहिए। निरहुआ ने आगे कहा कि मैं भी एक पॉलिटिशियन हूं और मेरा मानना ​​है कि राजनीति लोगों के वेलफेयर के लिए होनी चाहिए, उनका शोषण करने के लिए नहीं। अगर कोई पांच अलग-अलग भाषाएं सीखना चाहता है, तो सीख ले।

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