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Brain Mapping: बॉलीवुड एक्ट्रेस मनीषा कोइराला ने कराई ब्रेन मैंपिंग, क्या होती है ब्रेन मैपिंग और क्यों बढ़ रहा है इसका चलन

आजकल कुछ लोग बिना वजह के गुस्सा, स्ट्रेस से जूझते रहते है। समझ नहीं पाते कि उन्हें गुस्सा क्यो आ रहा है या फिर बेवजह उदास क्यो रहते है क्यों उन्हें स्ट्रेस घेरे रहता है। ऐसे में खुद को समझने और खुद के बारे में जानने के लिए लोग आजकल ब्रेन मैपिंक का सहारा ले रहे हैं। आजकल इसका काफी चलन है।

Brain Mapping: आजकल कुछ लोग बिना वजह के गुस्सा, स्ट्रेस से जूझते रहते है। समझ नहीं पाते कि उन्हें गुस्सा क्यो आ रहा है या फिर बेवजह उदास क्यो रहते है क्यों उन्हें स्ट्रेस घेरे रहता है। ऐसे में खुद को समझने और खुद के बारे में जानने के लिए लोग आजकल ब्रेन मैपिंक का सहारा ले रहे हैं। आजकल इसका काफी चलन है।

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ब्रेन मैपिंग हमारे दिमाग के अलग अलग हिस्सों को स्कैन करके बताती है कि हम क्या महसूस कर रहे है और क्यों ? इससे अपनी भावनाओं को अच्छी तरह से समझने में मदद मिलती है।

जो बातें हम खुद नहीं समझ पाते ब्रेन मैपिंग उन्हें भी बताने में मदद करती है। हाल ही में बॉलीवुड एक्ट्रेस मनीषा कोइराला ने अपनी ब्रेन मैपिंग कराई कराया था। उन्होंने ब्रेन मैपिंग के सेशन का एक्सपीरियंस सोशल मीडिया में शेयर किया था।

मनीषा कोइराला ने ब्रेन मैपिंग प्रोसेस की अपन फोटो और वीडियो शेयर करते हुए लिखा मैंने ब्रेन मैपिंग कराई और वाह क्या सफर रहा..मैंने न्यूरोलीप ब्रेन फंक्शन असेसमेंट करवाया, जिसमें कोई भी निजी सवार पूछे बिना ही मुझे अपने दिमाग के पैटर्न्स के बारे में अधिक जानकारी मिली।

यह प्रोसेस तीस मिनट का था, जिसमें कुछ सेंसर मेरे सिर पर लगाए गए थे। जो ब्रेन की वेव्स को पढ़ रहे थे। इसमें न तो कोई सवाल पूछा गया और नही कोई असुविधा हुई। सब कुछ कंफर्टेबल और सेफ था। लोगो को अपने भीतर को और गहराई से जानने के लिए प्रोसेस जरुर करना चाहिए।

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ब्रेन मैपिंग क्या है

ब्रेन मैपिंग एक न्यूरो-साइंस टेक्निक है। इसमें ब्रेन एक्टिविटी को मापा जाता है, ताकि समझा जा सके कि ब्रेन के अलग-अलग भाग कैसे काम करते हैं।ब्रेन मैपिंग आमतौर पर EEG (इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राफी) या fMRI (फंक्शनल मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग) जैसी तकनीकों के जरिए किया जाता है। इसमें सिर पर सेंसर लगाए जाते हैं, जो मस्तिष्क से निकलने वाली इलेक्ट्रिकल तरंगों को रिकॉर्ड करते हैं। इन तरंगों के आधार पर यह पता लगाया जाता है कि मस्तिष्क का कौन-सा हिस्सा किस स्थिति में सक्रिय होता है और वह व्यक्ति की सोच, भावना या व्यवहार पर कैसे प्रभाव डालता है।

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