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Brahma Temple: पुष्कर क्यों है ब्रह्मा जी की धरती? कमल की पंखुड़ी से सावित्री के श्राप तक की पूरी कहानी

हिंदू धर्म में भगवान ब्रह्मा को सृष्टि का रचयिता माना जाता है। लेकिन एक दिलचस्प बात यह है कि जहां देशभर में भगवान विष्णु और भगवान शिव के अनगिनत मंदिर मिलते हैं, वहीं ब्रह्मा जी के मंदिर बेहद कम हैं। इनमें राजस्थान के अजमेर जिले में स्थित पुष्कर का ब्रह्मा मंदिर सबसे प्रमुख और पवित्र माना जाता है। आखिर क्या है इस मंदिर का इतिहास और क्यों इसे इतना विशेष दर्जा प्राप्त है? आइए समझते हैं।

By Kalpna Pandey 
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Brahma Temple: पुष्कर केवल एक मंदिर के कारण प्रसिद्ध नहीं है, बल्कि इसका पूरा धार्मिक भूगोल ब्रह्मा जी से जुड़ा है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्मा जी के हाथ से एक कमल की पंखुड़ी धरती पर गिरी थी। जिस स्थान पर वह पंखुड़ी गिरी, वहां एक विशाल सरोवर बन गया, जिसे आज हम ‘पुष्कर सरोवर’ के नाम से जानते हैं। इसके बाद ब्रह्मा जी ने इसी स्थान पर एक महान यज्ञ करने का संकल्प लिया था। मंदिर में स्थापित ब्रह्मा जी की चतुर्मुखी (चार मुख वाली) प्रतिमा और लाल रंग का शिखर इस तीर्थ की पहचान हैं।

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मंदिरों की कमी और सावित्री का श्राप:

सवाल उठता है कि जब ब्रह्मा जी त्रिदेवों में से एक हैं, तो उनके मंदिर इतने कम क्यों हैं? धार्मिक मान्यताओं में इसके पीछे देवी सावित्री के श्राप की कथा सबसे प्रचलित है।
कहा जाता है कि पुष्कर में यज्ञ का शुभ मुहूर्त निकला जा रहा था, लेकिन ब्रह्मा जी की पत्नी सावित्री जी वहां समय पर नहीं पहुंच सकीं। यज्ञ बिना पत्नी के पूरा नहीं हो सकता था, इसलिए ब्रह्मा जी ने गायत्री नाम की कन्या से विवाह किया और उन्हें अपने साथ यज्ञ में बिठाकर अनुष्ठान पूरा किया।

जब देवी सावित्री वहां पहुंचीं और अपनी जगह किसी और को देखा, तो वे अत्यंत क्रोधित हो गईं। उन्होंने ब्रह्मा जी को श्राप दिया कि पूरी दुनिया में उनकी पूजा बहुत सीमित स्थानों पर ही होगी। हालांकि, बाद में क्रोध शांत होने पर उन्होंने पुष्कर को इस श्राप का अपवाद माना। यही कारण है कि पुष्कर को ब्रह्मा जी की पूजा का सबसे मुख्य केंद्र माना जाता है।

सावित्री और गायत्री का संबंध:

इस कथा में देवी सावित्री ब्रह्मा जी की मुख्य पत्नी हैं, जबकि गायत्री जी उस विशेष यज्ञ को संपन्न कराने के लिए उनकी संगिनी बनी थीं। आज भी पुष्कर में यह परंपरा जीवित दिखती है। पुष्कर की रत्नागिरि पहाड़ी पर देवी सावित्री का मंदिर स्थित है, जहां से पूरे पुष्कर शहर और सरोवर का खूबसूरत नजारा दिखाई देता है।

पहली बार पुष्कर जाने वालों के लिए सलाह:

यदि आप पहली बार पुष्कर जाने का मन बना रहे हैं, तो केवल मंदिर के दर्शन करके न लौटें। पुष्कर को सही मायने में समझने का एक खास क्रम है:

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पुष्कर सरोवर: सबसे पहले पवित्र सरोवर और उसके 52 घाटों के दर्शन करें, जहां से इस तीर्थ की शुरुआत हुई।

ब्रह्मा मंदिर: इसके बाद मुख्य मंदिर जाकर ब्रह्मा जी की चतुर्मुखी प्रतिमा का आशीर्वाद लें।

सावित्री मंदिर: समय हो तो रत्नागिरि पहाड़ी पर स्थित सावित्री मंदिर जरूर जाएं, ताकि इस पौराणिक कहानी का दूसरा पहलू भी समझ आ सके।

पुष्कर केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और लोककथाओं का एक ऐसा अनूठा संगम है, जो सदियों से श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता आ रहा है।

 

रिपोर्ट- दीपांजली मिश्रा

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