1. हिन्दी समाचार
  2. दिल्ली
  3. संसद मार्च में पुलिस एक्शन के खिलाफ सुनवाई से इनकार के दावों पर भड़के CJI, कहा- नहीं दायर हुई कोई याचिका

संसद मार्च में पुलिस एक्शन के खिलाफ सुनवाई से इनकार के दावों पर भड़के CJI, कहा- नहीं दायर हुई कोई याचिका

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (Chief Justice Surya Kant) ने शुक्रवार को उन मीडिया रिपोर्टों का खंडन किया जिनमें दावा किया गया था कि उन्होंने संसद चलो मार्च (Parliament March) के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिका को लिस्ट करने से इनकार कर दिया था।

By santosh singh 
Updated Date

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (Chief Justice Surya Kant) ने शुक्रवार को उन मीडिया रिपोर्टों का खंडन किया जिनमें दावा किया गया था कि उन्होंने संसद चलो मार्च (Parliament March) के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिका को लिस्ट करने से इनकार कर दिया था। CJI ने कहा कि ऐसी रिपोर्टें पूरी तरह से गलत हैं और गैर-जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग पर आधारित हैं।

पढ़ें :- सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल कर जंतर-मंतर प्रोटेस्ट की सभी FIR रद्द की, नहीं होगी दर्ज नई FIR

जानें क्या कहा CJI सूर्यकांत?

CJI सूर्यकांत (CJI Surya Kant)ने कहा कि पिछले दो दिनों में यह पूरी तरह से गलत बयान दिया गया कि कोई मामला दायर किया गया था। सुबह 10 बेज तक, एक भी पन्ना दायर नहीं किया गया था। यह केवल एक पत्र/अभ्यावेदन था। मैं उस पत्र को रिट याचिका कैसे मान सकता हूं?

उन्होंने कहा कि उन्होंने खुद रजिस्ट्री की स्थिति की पुष्टि की थी। मिश्रा नाम के किसी व्यक्ति ने इसका जिक्र किया था। मीडिया ने गलत रिपोर्टिंग की कि मैंने मामले को लिस्ट करने से इनकार कर दिया। यह केवल एक पत्र था और लोगों ने बिना सोचे-समझे इसकी रिपोर्टिंग शुरू कर दी।

पत्र में क्या-क्या मांग की गई थी

पढ़ें :- सुप्रीम कोर्ट में केंद्र के आश्वासन के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने लिया बड़ा फैसला, 5 सितंबर को नहीं करेगी 'दिल्ली मार्च'

वकील नरेंद्र मिश्रा ने CJI को लिखे पत्र में संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से स्वत: संज्ञान लेने का अनुरोध किया था। इसमें NEET-UG 2026 पेपर लीक के विरोध के दौरान मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था। पत्र में सादे कपड़ों में आए लोगों द्वारा हमले की जांच और ड्रोन फुटेज, बॉडी-कैमरा रिकॉर्डिंग जैसे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग भी की गई थी।

इस हफ्ते की शुरुआत में जब वकील ने तुरंत सुनवाई मांगी थी, तो CJI की बेंच ने कहा था कि कृपया हमारा समय बर्बाद न करें और अपना समय भी बर्बाद न करें। जस्टिस बागची और जस्टिस मोहना वाली बेंच ने वीडियो देखने से भी इनकार करते हुए कहा था, हमें वीडियो में कोई दिलचस्पी नहीं है। हमारे पास उन्हें देखने का समय नहीं है।

इस बीच केंद्र सरकार ने छात्रों को न्याय दिलाने का भरोसा दोहराया। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और जेपी नड्डा ने मेदांता अस्पताल में सोनम वांगुचक से मुलाकात कर प्रदर्शनकारी छात्रों की चिंताओं पर सकारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया था।

सरकार ने कहा कि वह संसद में पेपर लीक और परीक्षा सुधारों पर विस्तृत चर्चा कराएगी। जंतर-मंतर और 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान शांतिपूर्ण विरोध करने वालों के खिलाफ मामले दर्ज न करने पर भी सकारात्मक रुख है। साथ ही जिन छात्रों की कथित तौर पर आत्महत्या से मौत हुई उनके परिवारों को उचित मुआवजा देने पर विचार हो रहा है।

पढ़ें :- अभिजीत दीपके ने 5 सितंबर को दिल्ली मार्च का किया ऐलान, सुप्रीम कोर्ट का इस पर रोक लगाने से इनकार
इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...