अयोध्या में श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी (Ram Mandir Donation Scam) के आरोप मामले में दाखिल जनहित याचिका (PIL) पर बुधवार को सुनवाई संभावित है। याचिका में मामले की जांच सीबीआई (CBI) या किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने और चढ़ावे का ऑडिट नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से कराने की मांग की गई है।
लखनऊ। अयोध्या में श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी (Ram Mandir Donation Scam) के आरोप मामले में दाखिल जनहित याचिका (PIL) पर बुधवार को सुनवाई संभावित है। याचिका में मामले की जांच सीबीआई (CBI) या किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने और चढ़ावे का ऑडिट नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से कराने की मांग की गई है। बुधवार की वादसूची में न्यायमूर्ति पंकज भाटिया और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की ग्रीष्म अवकाश कालीन खंडपीठ के समक्ष पीआईएल क्रमांक 323 (PIL No. 323) पर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। याचिकाकर्ता अधिवक्ता मोहित अशोक ने बताया की वह बुधवार को इस अहम मामले की शीघ्र सुनवाई किए जाने का अनुरोध कोर्ट से करेगा। इसी 22 जून को समय की कमी के कारण अदालत इस पर सुनवाई नहीं कर सकी थी और अब इसपर 24 जून को सुनवाई हो सकती है।
मामले में न्यायिक आयोग बनाने की पीआईएल भी आज सूचीबद्ध
अयोध्या की श्री राम जन्मभूमि मंदिर (Shri Ram Janmabhoomi Mandir) में कथित चढ़ावा चोरी मामले में उच्चस्तरीय न्यायिक आयोग गठित करने के अनुरोध वाली एक नई जनहित याचिका (PIL) इसी 20 जून को हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में दाखिल हुई है। यह पी आई एल भी 24 जून की बाद सूची में क्रमांक 507 पर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। एक स्थानीय अधिवक्ता मोतीलाल यादव ने व्यक्तिगत रूप से यह पी आई एल दाखिल की है। इसमें कथित चढ़ावा चोरी मामले की जांच न्यायिक आयोग द्वारा कराए जाने की मांग की गई है। इसमें केंद्र, राज्य सरकार समेत पुलिस महानिदेशक, अयोध्या के जिलाधिकारी, एसएसपी, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, अयोध्या को इसके सचिव के माध्यम से पक्षकार बनाया गया है।
राम मंदिर की व्यवस्थाओं और दानराशि प्रबंधन की जांच कर रही एसआईटी ने मंगलवार को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। सूत्रों के अनुसार एसआईटी जांच (SIT Investigation) में राम मंदिर की व्यवस्थाओं से जुड़ी पांच बड़ी खामियां मिली हैं। जांच के दौरान मंदिर की प्रशासनिक, वित्तीय और संचालन व्यवस्था से जुड़ी कई गंभीर खामियां सामने आई हैं। रिपोर्ट में दानराशि की सुरक्षा से लेकर नियुक्तियों, खरीद प्रक्रिया और प्रसाद वितरण व्यवस्था तक कई बिंदुओं पर सवाल उठाए गए हैं।
जांच में पाया गया कि श्रद्धालुओं के चढ़ावे को मंदिर परिसर से बैंक तक पहुंचाने तथा गणना कक्ष में उसकी गिनती की प्रक्रिया में पर्याप्त सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था नहीं थी। यही कारण है कि दानराशि प्रबंधन को लेकर कई स्तरों पर सुधार की आवश्यकता महसूस की गई। एसआईटी (SIT) ने यह भी पाया कि श्रद्धालुओं की ओर से भेंट किए गए सोने और चांदी के आभूषणों का समुचित अभिलेखीकरण नहीं किया जा रहा था। ऐसे कई मामलों का उल्लेख किया गया है, जहां मूल्यवान धातुओं के संग्रहण और रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था मानक के अनुरूप नहीं मिली।
रिपोर्ट में मंदिर की विभिन्न नियुक्तियों पर भी सवाल उठाए गए हैं। जांच में सामने आया कि कई पदों पर नियुक्तियां निर्धारित प्रक्रिया और योग्यता मानकों के बजाय सिफारिशों के आधार पर की गईं। इससे प्रशासनिक दक्षता और जवाबदेही प्रभावित होने की बात कही गई है। सूत्रों के अनुसार एसआईटी ने इन सभी बिंदुओं पर सुधारात्मक कदम उठाने, जवाबदेही तय करने और वित्तीय व्यवस्थाओं को अधिक पारदर्शी बनाने की सिफारिश की है। शासन स्तर पर रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है और इसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
एसआईटी को सामग्री खरीद और प्रसाद वितरण में भी मिली खामियां
सामग्री खरीद की प्रक्रिया को लेकर भी एसआईटी (SIT) ने आपत्तियां दर्ज की हैं। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि कई मामलों में टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं थी। कुछ खरीद मामलों में कमीशनखोरी और निर्धारित प्रक्रिया के पालन न होने के संकेत भी मिले हैं। इसके अलावा प्रसाद वितरण और सीता रसोई के संचालन में भी कई खामियां सामने आई हैं। जांच में पाया गया कि खाद्य सामग्री और अन्य सामानों की खरीद कई बार बाजार दर से काफी अधिक कीमत पर की गई। इससे वित्तीय अनुशासन और निगरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़े हुए हैं।