अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, ‘एथनॉल’ मुनाफ़ाख़ोरी का नया नाम है। ये ‘सरकारी मिलावट’ का एक ऐसा त्रि-मिश्रण है जिसमें सरकार, एथनॉल बनानेवालों और तेल कंपनियों की साझेदारी है। एथनॉल के समर्थन में तर्क ये दिया जाता है कि इससे प्रदूषण कम होगा, आयात बिल घटेगा क्योंकि कच्चे तेल पर निर्भरता घटेगी लेकिन सरकार ये नहीं बता रही है कि इससे गाड़ियों की माइलेज गिरती है और गाड़ियां जल्दी ख़राब हो रही हैं...
लखनऊ। पेट्रोल में एथनॉल मिलाए जाने के मामले को लेकर देशभर में खूब चर्चा हो रही है। इसके फायदे और नुकसान बताए जा रहे हैं और देशभर में सियासत भी हो रही है। इन सबके बीच सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का एक बड़ा बयान आया है। उन्होंने कहा कि, एथनॉल के समर्थन में तर्क ये दिया जाता है कि इससे प्रदूषण कम होगा, आयात बिल घटेगा क्योंकि कच्चे तेल पर निर्भरता घटेगी लेकिन सरकार ये नहीं बता रही है कि इससे गाड़ियों की माइलेज गिरती है और गाड़ियाँ जल्दी ख़राब हो रही हैं।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, ‘एथनॉल’ मुनाफ़ाख़ोरी का नया नाम है। ये ‘सरकारी मिलावट’ का एक ऐसा त्रि-मिश्रण है जिसमें सरकार, एथनॉल बनानेवालों और तेल कंपनियों की साझेदारी है। एथनॉल के समर्थन में तर्क ये दिया जाता है कि इससे प्रदूषण कम होगा, आयात बिल घटेगा क्योंकि कच्चे तेल पर निर्भरता घटेगी लेकिन सरकार ये नहीं बता रही है कि इससे गाड़ियों की माइलेज गिरती है और गाड़ियां जल्दी ख़राब हो रही हैं, स्टार्टिंग की समस्या बढ़ गई है, कुल मिलाकर कम एवरेज की वजह से तेल ज़्यादा डलवाना पड़ रहा है, गाड़ियां बीच सड़क में धोखा दे रही हैं, जिससे मेंटेनेंस कॉस्ट बढ़ गई है, गाड़ी की रीसेल वैल्यू घट गयी है और ओवर ऑल लाइफ़ भी।
‘एथनॉल’ मुनाफ़ाख़ोरी का नया नाम है। ये ‘सरकारी मिलावट’ का एक ऐसा त्रि-मिश्रण है जिसमें सरकार, एथनॉल बनानेवालों और तेल कंपनियों की साझेदारी है।
एथनॉल के समर्थन में तर्क ये दिया जाता है कि इससे प्रदूषण कम होगा, आयात बिल घटेगा क्योंकि कच्चे तेल पर निर्भरता घटेगी लेकिन सरकार ये नहीं… pic.twitter.com/jMsRiNmcoq
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) July 13, 2026
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उन्होंने आगे लिखा, एथनॉल की वजह से ज़ंग और जंक दोनों की समस्या बढ़ रही है। पुरानी गाड़ियां एथनॉल के हिसाब से नहीं बनी हैं, इसीलिए बीमा कंपनियों के अपने एतराज़ हैं और कार-बाइक ख़राब होने पर उन्हें क्लेम न देने का एक और बहाना मिल जाता है।
आज के महंगाई के समय में जब मां-बाप युवाओं को किसी तरह से लाखों रुपये में एक बाइक दिलाते हैं या युवा कार लोन लेकर अपनी गाड़ी का सपना पूरा करते हैं तो उनकी चिंता महंगा तेल भी होता है और एथनॉल की वजह से गाड़ी ख़राब होने और फिर ठीक कराने का लगातार बढ़ता ख़र्चा भी। सच तो ये है कि जब खानेपीने वाली चीजों से फ्यूल बनेगा तो खाद्य महंगाई बढ़ेगी साथ ही इसका नुक़सान पर्यावरण को भी होगा क्योंकि एथनॉल के लिए पानी की भी बहुत खपत होती है। सरकार बताए कि चंद मुनाफ़ाख़ोरों के लिए वो जनता का शोषण क्यों कर रही है।