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सुप्रीम कोर्ट से पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा ‘टेनी’ के बेटे आशीष मिश्रा को मिली जमानत, दिल्ली या लखनऊ में रहने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने 2021 के लखीमपुर-खीरी हिंसा मामले (Lakhimpur-Kheri Violence Case) में पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा 'टेनी' (Former Union Minister Ajay Mishra 'Teni') के बेटे आशीष मिश्रा (Ashish Mishra) को जमानत दी। कोर्ट ने जमानत अर्जी मंजूर करने के बाद उन्हें दिल्ली (Delhi) या लखनऊ (Lucknow) में रहने का निर्देश दिया है।

By santosh singh 
Updated Date

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने 2021 के लखीमपुर-खीरी हिंसा मामले (Lakhimpur-Kheri Violence Case) में पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा ‘टेनी’ (Former Union Minister Ajay Mishra ‘Teni’) के बेटे आशीष मिश्रा (Ashish Mishra) को जमानत दी। कोर्ट ने जमानत अर्जी मंजूर करने के बाद उन्हें दिल्ली (Delhi) या लखनऊ (Lucknow) में रहने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने अधीनस्थ अदालत को मामले की सुनवाई में तेजी लाने और समयसीमा तय करने का निर्देश दिया।

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बता दें कि लखीमपुर खीरी हिंसा (Lakhimpur Kheri violence) में  आठ लोगों की जान चली गई थी। इसके बाद उनके दिल्ली या लखनऊ जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। पिछले साल 25 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने हिंसा की दुर्भाग्यपूर्ण भयावह घटना में आशीष मिश्रा (Ashish Mishra)  को अंतरिम जमानत दी थी। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने मामले में किसानों को भी जमानत दी और ट्रायल कोर्ट को सुनवाई में तेजी लाने का निर्देश दिया।

पीठ ने कहा कि सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अंतरिम आदेश को निरपेक्ष बनाया गया है। हमें सूचित किया गया है कि 117 गवाहों में से अब तक सात की जांच की जा चुकी है। हमारे विचार में मुकदमे की कार्यवाही में तेजी लाने की जरूरत है। हम ट्रायल कोर्ट को निर्देश देते हैं कि वह लंबित अन्य समयबद्ध या जरूरी मामलों को ध्यान में रखते हुए समय-सारिणी तय करे, लेकिन लंबित विषय को प्राथमिकता दे।

क्या है मामला?
जिले में हिंसा तब भड़की थी, जब किसानों ने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के क्षेत्र के दौरे के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था। इस दौरान चार किसानों को एक स्पोर्ट्स यूटिलिटी वाहन ने कुचल दिया था। इसके बाद एक ड्राइवर और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के दो कार्यकर्ताओं को गुस्साए किसानों ने कथित तौर पर पीट-पीटकर मार डाला था। इस हिंसा में एक पत्रकार की भी मौत हुई थी।

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