1. हिन्दी समाचार
  2. दिल्ली
  3. असम सरकार ने आदिवासी जिले की आधी भूमि सीमेंट कंपनी को सौंपी, गुवाहाटी हाईकोर्ट ने लगाई फटकार, पूछा- क्या यह कोई मजाक है?

असम सरकार ने आदिवासी जिले की आधी भूमि सीमेंट कंपनी को सौंपी, गुवाहाटी हाईकोर्ट ने लगाई फटकार, पूछा- क्या यह कोई मजाक है?

गुवाहाटी हाईकोर्ट (Guwahati High Court) ने असम की हिमंता विस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) सरकार को राज्य के आदिवासी बहुल दीमा हसाओ जिले (Dima Hasao District) में एक प्राइवेट सीमेंट कंपनी को 3000 बीघा जमीन देने पर फटकार लगाई है। अदालत ने पूछा कि क्या यह कोई मजाक है?

By santosh singh 
Updated Date

गुवाहाटी : गुवाहाटी हाईकोर्ट (Guwahati High Court) ने असम की हिमंता विस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) सरकार को राज्य के आदिवासी बहुल दीमा हसाओ जिले (Dima Hasao District) में एक प्राइवेट सीमेंट कंपनी को 3000 बीघा जमीन देने पर फटकार लगाई है। अदालत ने पूछा कि क्या यह कोई मजाक है? अदालत ने उत्तरी कछार पर्वतीय जिला स्वायत्त परिषद (NCHDAC) के वकील को कंपनी को इतनी बड़ी जमीन देने की नीति से जुड़े रिकॉर्ड पेश करने का आदेश दिया है। दरअसल 22 लोगों ने और महाबल सीमेंट कंपनी ने याचिकाएं दायर की हैं। इन पर एक साथ सुनवाई होगी। मामले की अगली सुनवाई 1 सितंबर को होगी।

पढ़ें :- Japan Open 2026 : पीवी सिंधू ने वर्ल्ड नंबर 5 खिलाड़ी हान यू को किया पस्त, जापान ओपन के क्वार्टर फाइनल में बनाई जगह

कोर्ट ने उठाए सख्त सवाल

गुवाहाटी हाईकोर्ट (Guwahati High Court)  के जस्टिस संजय कुमार मेधी (Justice Sanjay Kumar Medhi) ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कई सवाल उठाए। उन्होंने अपने आदेश में कहा कि मामले के तथ्यों पर सरसरी निगाह डालने से पता चलता है कि जो जमीन आवंटित की गई है, वह लगभग 3000 बीघा है, जो अपने आप में असाधारण प्रतीत होती है। याचिका पर सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा कि 3,000 बीघा,ये क्या हो रहा है? 3,000 बीघा जमीन एक निजी कंपनी को आवंटित? ये कैसा फैसला है? ये कोई मजाक है या कुछ और?

जमीन देने संबंधी दस्तावेज मांगे

जस्टिस मेधी (Justice Medhi) ने कहा कि ये दोनों रिट याचिकाएं आपस में जुड़ी हुई हैं और इन पर एकसाथ सुनवाई की जाएगी। उन्होंने अपने आदेश में यह भी कहा कि प्रतिवादी के वकील ने हालांकि, यह दलील दी है कि ऐसा आवंटन एक टेंडर प्रक्रिया के तहत दिए गए खनन पट्टे के तहत किया गया है। उन्होंने कहा कि यह अदालत एनसीएचएसी के स्थायी वकील को निर्देश देती है कि वे 3000 बीघा जमीन का इतना बड़ा टुकड़ा एक कारखाने को आवंटित करने की नीति से संबंधित रिकॉर्ड प्राप्त करें।

पढ़ें :- भाजपा अपने अनरजिस्टर्ड संगी-साथियों के अवैधानिक भवनों को कब ढहाएगी? जौहर यूनिवर्सिटी विवाद पर बोले अखिलेश यादव

पर्यावरण के लिए अहम है क्षेत्र

जस्टिस मेधी (Justice Medhi) ने अपने आदेश में कहा कि यह निर्देश इस बात को ध्यान में रखते हुए दिया गया है कि संबंधित क्षेत्र संविधान की छठी अनुसूची के अंतर्गत आता है, जहां वहां रहने वाले आदिवासी लोगों के अधिकारों और हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उमरांगसो का यह क्षेत्र एक पर्यावरण की दृष्टि से एक प्रमुख क्षेत्र के रूप में भी जाना जाता है, जहां गर्म पानी के झरने, प्रवासी पक्षियों और वन्यजीवों के लिए ठहरने की जगहें आदि हैं।

अगली सुनवाई 1 सितंबर को

पिछले साल अक्टूबर में कोलकाता में रजिस्टर्ड पते वाली कंपनी को 2,000 बीघा जमीन आवंटित की गई थी, जबकि अगले महीने पहले वाले से सटे 1000 बीघा का एक अतिरिक्त भूखंड भी दिया गया था। एनसीएचएसी के अतिरिक्त सचिव (राजस्व) की ओर से जारी आवंटन आदेश में कहा गया है कि आवंटन का मकसद एक सीमेंट संयंत्र की स्थापना है। इस मामले की अगली सुनवाई एक सितंबर को होगी।

 

पढ़ें :- न बाप बड़ा न भैया, सबसे बड़ा रुपैया: बेटे ने पिता को 6 गोलियों से भूना, 150 करोड़ की थी संपत्ति

Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...