सात बार की चैंपियन भारतीय टीम की नजरें श्रीलंका के खिलाफ रविवार को महिला टी20 एशिया कप फाइनल में श्रीलंका को हराकर आठवीं बार खिताब जीतने पर लगी होंगी। इसके लिए शेफाली वर्मा के साथ दीप्ति शर्मा पर काफी दारोमदार रहेगा।
नई दिल्ली। सात बार की चैंपियन भारतीय टीम की नजरें श्रीलंका के खिलाफ रविवार को महिला टी20 एशिया कप फाइनल में श्रीलंका को हराकर आठवीं बार खिताब जीतने पर लगी होंगी। इसके लिए शेफाली वर्मा के साथ दीप्ति शर्मा पर काफी दारोमदार रहेगा। दो अर्धशतक समेत 168 रन बना चुकी शेफाली भारत की सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज साबित हुई हैं और टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन उन्होंने बनाए हैं। धीमी और स्पिनरों की मददगार दुबई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम की पिच पर भी उन्होंने सहज बल्लेबाजी की है।
महिला एशिया कप में भारत का दबदबा
भारतीय महिला टीम का एशिया कप में दबदबा रहा है। भारतीय टीम वनडे हो या टी20 इस टूर्नामेंट के हर प्रारूप में हमेशा खिताबी मुकाबले तक पहुंची है। भारत ने सर्वाधिक सात बार खिताब अपने नाम किया है और अब वह अपने आठवें खिताब से एक कदम दूर है। भारत ने 2004, 2005, 2006, 2008 में वनडे प्रारूप और 2012, 2016 और 2022 में टी20 प्रारूप में एशिया कप अपने नाम किया था। उसे 2018 और 2024 में फाइनल में हार मिली थी।
मंधाना-शेफाली ने दिखाया है दम
स्मृति मंधाना (154) ने एक शानदार शतक लगाया, लेकिन दो मैचों में दोहरे अंक तक नहीं पहुंच सकीं। शेफाली के प्रदर्शन में निरंतरता रही है। शेफाली को अपने चिर परिचित स्ट्रोक्स खेलने में भी परेशानी नहीं आई, जबकि दूसरे बल्लेबाज जूझते नजर आए हैं। श्रीलंका की कप्तान चामारी अटापट्टू के साथ सर्वाधिक 11 विकेट ले चुकीं दीप्ति ने गेंदबाजी के अलावा बल्ले से भी दम दिखाया है। बांग्लादेश के खिलाफ सेमीफाइनल में छह गेंद में 13 रन बनाकर उन्होंने भारत को 150 रन के पास पहुंचाया। दीप्ति के साथ श्री चरणी और प्रेमा रावत ने भी उम्दा स्पिन गेंदबाजी की है और इन तीनों ने टूर्नामेंट में अपना दबदबा बनाए रखा है।
अब तक अजेय हैं दोनों टीमें
दोनों टीमें फाइनल तक के सफर में अपराजेय रही हैं और पिछली बार 2024 में भारत को श्रीलंका ने ही फाइनल में आठ विकेट से हराया था। अटापट्टू की टीम ने भी पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया है और पाकिस्तान के खिलाफ जुझारूपन दिखाते हुए सेमीफाइनल में जीत दर्ज की। पहले दो ओवर में पांच रन पर दो विकेट और सातवें ओवर में 33 रन पर चार विकेट निकल जाने के बावजूद श्रीलंका ने 131 रन का लक्ष्य हासिल किया।
हर्षिता समरविक्रमा ने सर्वाधिक 36 रन बनाए. जबकि कविषा दिलहारी ने 33 रन का योगदान दिया। नीलाक्षिका सिल्वा और कौशिनी नुथ्यांगना ने फिनिशर की भूमिका बखूबी निभाई। दो साल पहले दाम्बुला में हर्षिता और अटापट्टू ने मिलकर भारत को फाइनल में जीत दर्ज करने से रोका था। दोनों ने अर्धशतकीय पारियां खेलकर लक्ष्य हासिल किया था। उस टीम के अधिकांश खिलाड़ी एक बार फिर फाइनल में होंगे और हरमनप्रीत कौर की टीम उन गलतियों को दोहराने से बचना चाहेगी।
ये है भारतीय टीम की कमजोरी
भारतीय बल्लेबाजी को मध्यक्रम की नाकामी और लचर क्षेत्ररक्षण की कमजोरियों से उबरना होगा। शेफाली के फॉर्म और मंधाना के शतक को छोड़ दिया जाए तो भारत के सभी बल्लेबाज अच्छी शुरूआत को बड़ी पारियों में बदलने में नाकाम रहे हैं। बांग्लादेश के खिलाफ सेमीफाइनल में भारत ने चार कैच छोड़े और दो प्रतिका रावल के हाथ से छूटे। इससे पहले पाकिस्तान के खिलाफ भी प्रतिका ने दो कैच टपकाए थे। थाईलैंड के खिलाफ पहले मैच में भी भारत ने दो कैच छोड़े थे यानी अब तक चार मैचों में नौ कैच छूट चुके हैं।
प्लेइंग-11 में बदलाव की कितनी संभावना?
भारत ने अब तक टूर्नामेंट में एक ही प्लेइंग-11 टीम उतारी है फाइनल में ही कोई बदलाव की उम्मीद नजर नहीं आ रही। दूसरी ओर, श्रीलंका ने अपने 17 खिलाड़ियों में से 14 का इस्तेमाल किया है। पाकिस्तान के खिलाफ सेमीफाइनल में, उन्होंने हसिनी परेरा और मिताली अयोध्या के लिए विश्मी गुनारत्ने और चेतना विमुक्ति को बाहर रखा, जो शायद उनकी सबसे अच्छी प्लेइंग-11 हो सकती है।
दोनों टीमों की संभावित प्लेइंग-11:
भारत: स्मृति मंधाना, शेफाली वर्मा, प्रतिका रावल, हरमनप्रीत कौर (कप्तान), ऋचा घोष (विकेटकीपर), भारती फुलमाली, दीप्ति शर्मा, प्रेमा रावत, क्रांति गौड़, श्री चरणी, नंदिनी शर्मा।
श्रीलंका: इमेशा दुलानी, चामरी अट्टापट्टू (कप्तान), संजन काविंदी, हर्षिता समरविक्रमा, हसिनी परेरा, कविषा दिलहारी, नीलाक्षिका सिल्वा, कौशिनी नुथ्यांगना, सुगंदिका कुमारी, चामुदी प्राबोदा, मिताली