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भारत ने छिड़का ट्रंप के जख्मों पर नमक, डॉलर की जगह युआन में किया क्रूड ऑयल का भुगतान 

भारत और ईरान के बीच तेल के कारोबार को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। लंबे समय के बाद भारतीय रिफाइनरियों ने ईरान से कच्चा तेल खरीदा है, लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस सौदे के लिए भुगतान डॉलर में नहीं, बल्कि चीनी करेंसी युआन में किया गया है।

By santosh singh 
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नई दिल्ली। भारत और ईरान के बीच तेल के कारोबार को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। लंबे समय के बाद भारतीय रिफाइनरियों ने ईरान से कच्चा तेल खरीदा है, लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस सौदे के लिए भुगतान डॉलर में नहीं, बल्कि चीनी करेंसी युआन में किया गया है।

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इस बारे में इकॉनमिक्स टाइम्स ने एक रिपोर्ट छापी है, जिसमें सूत्रों के हवाले से ऐसी जानकारी दी गई है। यदि ये सच है तो भारत ने अमेरिका की पाबंदियों के बीच अपना रास्ता निकालते हुए ऐसा कदम उठाया है, ताकि देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया जा सके।

भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने ईरान से खरीदे गए कच्चे तेल का भुगतान करने के लिए एक नया तरीका निकाला है। सूत्रों के मुताबिक, मुंबई में मुख्यालय वाले आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) के जरिए यह पेमेंट चीन की करेंसी युआन में की गई है। दरअसल, अमेरिका ने ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं, जिसकी वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर में लेन-देन करना बहुत मुश्किल है। इसी समस्या को सुलझाने के लिए आईसीआईसीआई बैंक ने अपनी शंघाई ब्रांच का इस्तेमाल किया और वहां से पैसे सीधे विक्रेता के युआन खातों में भेज दिए।यह पहली बार है जब ईरान के साथ इतने बड़े सौदे के लिए चीनी मुद्रा का इस्तेमाल सार्वजनिक चर्चा में आया है।

7 साल बाद ईरान से आया तेल

भारत की सबसे बड़ी सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (Indian Oil Corp) ने करीब सात साल के लंबे इंतजार के बाद ईरान से 20 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा है।’जया’ नाम के एक बहुत बड़े टैंकर के जरिए यह तेल भारत पहुंचा है, जिसकी कीमत लगभग 200 मिलियन डॉलर यानी भारतीय रुपयों में करोड़ों में है।

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इस सौदे की खास बात यह रही कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने तेल की कुल कीमत का 95% हिस्सा तभी चुका दिया, जब जहाज भारतीय समुद्री सीमा में दाखिल हुआ।आमतौर पर सरकारी कंपनियां तेल मिलने के बाद भुगतान करती हैं, लेकिन इस बार नियम थोड़े अलग रहे। सरकारी कंपनी के अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) जैसी निजी कंपनियों को भी ईरानी तेल के जहाज लाने की अनुमति दी गई है।

अमेरिकी पाबंदियां और आगे की चुनौतियां

अमेरिका और इजरायल के बीच ईरान के साथ चल रहे तनाव के कारण तेल की कीमतें बहुत बढ़ गई थीं। इसे कम करने के लिए अमेरिका ने ईरान से तेल खरीदने की 30 दिन की एक खास छूट दी थी, जिसकी समय सीमा अब खत्म हो रही है. अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट (Scott Bessent) ने साफ कर दिया है कि ईरान को दी गई यह छूट आगे नहीं बढ़ाई जाएगी। इसका मतलब है कि आने वाले समय में ईरान से तेल खरीदना फिर से मुश्किल हो जाएगा।यही वजह है कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन अब आगे और तेल खरीदने की योजना नहीं बना रहा है। भारत के लिए यह कदम अपनी ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने और महंगे तेल से बचने की एक कोशिश मात्र था।

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