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भारतीय सेना ने अब ट्रंप को दिखाया आईना, 1971 की जंग में अमेरिका ने पाक को 2 अरब डॉलर के हथियारों की आपूर्ति, फिर भी हमने दुश्मनों को चारों खाने किया चित

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) की टैरिफ वाली धमकी दी है। इसके बाद भारतीय सेना ने अमेरिकी राष्ट्रपति (US President) को आईना दिखाया है। सेना ने अमेरिका को 2 अरब डॉलर के हथियारों की याद दिलाई है। जब अमेरिका ने 1971 के युद्ध से पहले पाकिस्तान को 2 अरब डॉलर के हथियारों की सप्लाई की थी।

By संतोष सिंह 
Updated Date

लखनऊ। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) की टैरिफ वाली धमकी दी है। इसके बाद भारतीय सेना ने अमेरिकी राष्ट्रपति (US President) को आईना दिखाया है। सेना ने अमेरिका को 2 अरब डॉलर के हथियारों की याद दिलाई है। जब अमेरिका ने 1971 के युद्ध (1971 war) से पहले पाकिस्तान को 2 अरब डॉलर के हथियारों की सप्लाई की थी। सेना के पूर्वी कमान (Eastern Command) ने 1971 के अखबार की एक पुरानी क्लिप शेयर की है।

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सेना ने ट्वीट कर कहा कि 1954 से लेकर 1971 तक अमेरिका ने पाकिस्तान को दो अरब डॉलर के हथियारों की सप्लाई की है। अखबार की क्लिप 5 अगस्त 1971 की है। इस ट्वीट में ये बताया गया है कि अमेरिका कैसे 1971 के युद्ध की तैयारी के लिए दशकों से पाकिस्तान को हथियारों की सप्लाई कर रहा था। 1971 की जंग में भारत ने पाकिस्तान को चारों खाने चित कर दिया था।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी दिखा चुका है अमेरिका को आईना

इससे पहले ट्रंप की टैरिफ धमकियों को लेकर भारत सरकार की ओर से पलटवार किया गया था। विदेश मंत्रालय ने अमेरिका और यूरोपीय संघ द्वारा भारत की आलोचना पर कड़ा जवाब देते हुए कहा है कि रूसी तेल खरीदने को लेकर जो आलोचना की जा रही है वो अनुचित और बेबुनियाद है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि, ‘भारत पर निशाना साधना न सिर्फ गलत है, बल्कि खुद इन देशों की कथनी और करनी में फर्क भी उजागर करता है। उन्होंने कहा कि भारत को रूस से अधिक तेल आयात करना पड़ा, क्योंकि यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद पारंपरिक सप्लायर्स ने अपनी आपूर्ति यूरोप की तरफ मोड़ दी थी। उस समय अमेरिका ने खुद भारत को ऐसे कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित किया था, ताकि वैश्विक ऊर्जा बाजार स्थिर रह सके। MEA की ओर से तीखे शब्दों में ये भी कहा गया कि बड़ी हैरानी की बात है जो देश भारत की आलोचना कर रहे हैं, वही खुद भी रूस से व्यापार कर रहे हैं, जबकि उनके लिए यह कोई राष्ट्रीय अनिवार्यता नहीं है।

 

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