केरलम विधानसभा चुनाव (Kerala Assembly Elections) के रुझानों में कांग्रेस की अगुवाई वाला यूडीएफ गठबंधन 99 विधानसभा सीटों पर आगे चल रहा है। लेफ्ट की अगुवाई वाला गठबंधन 39 सीटों पर आगे है। बीजेपी की अगुवाई वाला एनडीए (NDA) दो सीटों पर आगे है।
नई दिल्ली। केरलम विधानसभा चुनाव (Kerala Assembly Elections) के रुझानों में कांग्रेस की अगुवाई वाला यूडीएफ गठबंधन 99 विधानसभा सीटों पर आगे चल रहा है। लेफ्ट की अगुवाई वाला गठबंधन 39 सीटों पर आगे है। बीजेपी की अगुवाई वाला एनडीए (NDA) दो सीटों पर आगे है।
केरल विधानसभा चुनाव (Kerala Assembly Elections) में जारी वोटों की गिनती के बीच अब तक के रुझानों में 10 साल कांग्रेस की सत्ता में वापसी होती दिख रही है। खबर अपडेट किए जाने तक चुनाव आयोग (Election Commission) की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक यूडीएफ गठबंधन की तरफ से कांग्रेस 49 और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग 17 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं एलडीएफ गठबंधन की तरफ से CPI(M) 29 और CPI 12 सीटों पर आगे चल रही है। KEC(M) 4 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। इसके साथ ही चर्चा शुरू हो गई है कि कांग्रेस केरल में किसे मुख्यमंत्री बनाएगी।
केरलम चुनाव में ये 5 नेता हैं सीएम की रेस में
वीडी सतीशन : केरल में मुख्यमंत्री की रेस में वीडी सतीशन भी दावेदार माने जा रहे हैं। वर्तमान में केरल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं। राज्य में कांग्रेस के चर्चित नेता हैं. उन्हें एलडीएफ गठबंधन के सहयोगी IUML का भी समर्थन मिलता रहा है। वह 2001 से लगातार एर्नाकुलम जिले के पारवूर विधानसभा सीट से लगातार चुनावा जीतते रहे हैं। मई 2021 में केरल विधानसभा चुनाव के बाद, कांग्रेस पार्टी ने उन्हें राज्य में विपक्ष के नेता बनाया था। राजनीति में आने से पहले वह केरल हाईकोर्ट वकालत की प्रैक्टिस कर चुके हैं। इसके अलावा, वे ट्रेड यूनियन के सक्रिय कार्यकर्ता और कई श्रमिक संगठनों के अध्यक्ष भी हैं।
सनी जोसेफ : कांग्रेस की तरफ से मुख्यमंत्री दावेदार में सनी जोसेफ के नाम की भी चर्चा है. वह केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के वर्तमान अध्यक्ष हैं। उन्हें 8 मई 2025 को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति (केएसयू – KSU) से की थी और वे कन्नूर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। समर्थकों के बीच उन्हें ‘सनी वकील’ के नाम से भी जाना जाता है। राजनीति में आने से पहले वे पेशे से एक वकील थे।
रमेश चेन्निथला : केरल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला भी मुख्यमंत्री पद की रेस में माने जा रहे हैं। रमेश चेन्निथला केरल के वरिष्ठ राजनेता हैं। वह कांग्रेस कार्य समिति (CWC) के स्थायी आमंत्रित सदस्य हैं। वह हरिपद सीट से विधानसभा चुनाव जीतते रहे हैं.2026 के केरल विधानसभा चुनावों में, उन्हें कांग्रेस के चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। वह इससे पहले 2016 से 2021 तक केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में कार्य किया है। 2014 से 2016 के बीच वे ओमन चांडी सरकार में केरल के गृह और सतर्कता मंत्री रहे। 2005 से 2014 तक वे केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के अध्यक्ष भी रहे। 1986 में, जब वे मात्र 28 वर्ष के थे, तब उन्हें केरल सरकार में मंत्री बनाया गया था, जो राज्य के सबसे युवा मंत्री का रिकॉर्ड है।
केसी वेणुगोपाल : राहुल गांधी के करीबी केसी वेणुगोपाल केरल में मुख्यंत्री पद के दावेदार माने जा रहे हैं। वह फिलहाल लोकसभा में सांसद हैं और कांग्रेस के मुख्य रणनीतिकारों में गिने जाते हैं। वह लंबे समय से अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के महासचिव (संगठन) के रूप में कार्य कर रहे हैं और पार्टी के संगठनात्मक फैसलों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दौरान, उन्होंने केंद्रीय राज्य मंत्री (ऊर्जा और नागरिक उड्डयन) के रूप में कार्य किया है।
शशि थरूर : केरल में मुख्यमंत्री की रेस में कांग्रेस की तरफ से शशि थरूर के नाम की भी चर्चा में है। तिरुवनंतपुरम से सांसद थरूर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं। वह 2009 से लगातार तिरुवनंतपुरम लोकसभा सीट से सांसद चुने जा रहे हैं। उन्होंने विदेश राज्य मंत्री और मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री के रूप में भी कार्य किया है। वे कांग्रेस पार्टी के भीतर मुखर और प्रगतिशील आवाज माने जाते हैं। राजनीति में आने से पहले, थरूर ने संयुक्त राष्ट्र (UN) में लगभग 29 वर्षों तक कार्य किया। उन्होंने अंडर-सेक्रेटरी-जनरल (संचार और जन सूचना) के पद पर काम किया और 2006 में संयुक्त राष्ट्र महासचिव के पद के चुनाव में वे दूसरे स्थान पर रहे थे।
सीएम पद के दावेदार को लेकर पूछे गए सवाल पर तिरुवनंतपुरम में कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि ‘पार्टी में एक तय प्रक्रिया है। चुनाव नतीजों के बाद पार्टी अध्यक्ष का प्रतिनिधि नवनिर्वाचित विधायकों से राय लेता है और उसकी रिपोर्ट आलाकमान को सौंपी जाती है। अंतिम निर्णय आलाकमान ही करता है और वह किसी भी नियम या सीमा से बंधा नहीं होता। थरूर के इस बयान से साफ है कि मुख्यमंत्री के चयन के लिए सभी विकल्प खुले हैं।