1. हिन्दी समाचार
  2. मध्य प्रदेश
  3. मध्यप्रदेश, जहां पर बच्चों को पढ़ाना अभिभावकों को बहुत भारी पड़ रहा है

मध्यप्रदेश, जहां पर बच्चों को पढ़ाना अभिभावकों को बहुत भारी पड़ रहा है

नए सत्र की किताबों को खरीदवाने के बाद एक बार फिर से अभिभावकों को नए सिरे किताबें खरीदनी होंगी। इसका ताजा उदाहरण एक बार फिर सामने आने वाला है क्योंकि निजी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों को एक बार फिर नये सिरे से किताबों को खरीदना होगा।

By Shital Kumar 
Updated Date

भोपाल। मध्यप्रदेश ऐसा राज्य है, जहां पर बच्चों को पढ़ाना अभिभावकों को बहुत भारी पड़ रहा है। इसकी वजह है निजी स्कूलों के प्रबंधन का रसूख। वे सरकार से लेकर शासन प्रशासन तक की नहीं सुनते हैं।

पढ़ें :- अभिजीत दिपके, बोले-धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा जनता के अंदर से डर खत्म होने का है प्रतीक, सितंबर से चलेगा 'बोलती पब्लिक' अभियान

 

 

प्रबंधन शासन प्रशासन की सुनते ही नहीं है

यही वजह है कि नए सत्र की किताबों को खरीदवाने के बाद एक बार फिर से अभिभावकों को नए सिरे किताबें खरीदनी होंगी। भले ही शासन प्रशासन निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम कसने की कवायद करते रहे हो लेकिन बावजूद इसके जिस तरह से इन स्कूल प्रबंधनों का रसूख है उस कारण प्रबंधन शासन प्रशासन की सुनते ही नहीं है। इसका ताजा उदाहरण एक बार फिर सामने आने वाला है क्योंकि निजी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों को एक बार फिर नये सिरे से किताबों को खरीदना होगा।

पढ़ें :- UPSC CMS Answer Key 2026 : यूपीएससी सीएमएस प्रोविजनल आंसर की जारी, ऐसे करें PDF डाउनलोड

 

कक्षाओं का पाठ्यक्रम बदलने जा रहा है

दरअसल, सीबीएसई प्राइमरी और माध्यमिक कक्षाओं का पाठ्यक्रम बदलने जा रहा है। उधर, निजी स्कूलों में एनसीईआरटी की जगह निजी प्रकाशकों की किताबों से पढ़ाई कराई जा रही है। इस मामले में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए थे कि सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें ही पढ़ाई जाएं। इसके बाद 29 मार्च को को स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने गाडरवारा में भी यही बयान दिया था।

इसके बाद भी इस निर्देश का पालन पूरी तरह से नहीं हुआ है। प्राइवेट स्कूलों की मनमानी का दूसरा मामला ये है कि सीबीएसई इस साल कक्षा चौथी, पांचवी, सातवीं, आठवीं का सिलेबस बदल रहा है। इसका सर्कुलर भी जारी किया गया है। मगर, स्कूलों के दबाव में पेरेंट्स को पुराने सिलेबस की किताबें खरीदने पर मजबूर होना पड़ा है। इससे यह तो तय है कि इस बार पेरेंट्स को नए सिलेबस के मुताबिक जून में दोबारा किताबें खरीदनी पड़ेंगी।

पढ़ें :- पोलियो ड्रॉप के बाद अकड़े 3 साल की बच्ची के हाथ-पैर! भोपाल एम्स में इलाज, स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की जांच
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...