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“दो दिन की तिथि ने बढ़ाया कन्फ्यूजन! जानिए 2026 में कब है महावीर जयंती”

जैन पंचांग के अनुसार, चैत्र शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 30 मार्च 2026 को सुबह 07:09 बजे शुरू होकर 31 मार्च 2026 को सुबह 06:56 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के नियम के आधार पर 31 मार्च 2026 (मंगलवार) को ......

By हर्ष गौतम 
Updated Date
महावीर जयंती, 2026।  महावीर जयंती जैन धर्म का सबसे बड़ा और पवित्र पर्व माना जाता है, लेकिन साल 2026 में इसकी तारीख को लेकर लोगों में काफी असमंजस देखने को मिल रहा है। वजह है त्रयोदशी तिथि का दो दिनों तक पड़ना, जिससे कई लोग कंफ्यूज हैं कि असली महावीर जयंती आखिर कब मनाई जाएगी।
31 मार्च को मनाई जाएगी मुख्य महावीर जयंती
जैन पंचांग के अनुसार, चैत्र शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 30 मार्च 2026 को सुबह 07:09 बजे शुरू होकर 31 मार्च 2026 को सुबह 06:56 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के नियम के आधार पर 31 मार्च 2026 (मंगलवार) को ही महावीर जयंती का मुख्य पर्व मनाया जाएगा। हालांकि, कुछ लोग जो केवल तिथि के आरंभ को मानते हैं, वे 30 मार्च को भी इस पर्व को मना सकते हैं, लेकिन अधिकांश जैन समाज और परंपराएं 31 मार्च को ही प्राथमिकता देती हैं।
सिर्फ जन्मोत्सव नहीं, जीवन का संदेश है यह पर्व
महावीर जयंती केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक सीख भी है। भगवान महावीर स्वामी ने अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, ब्रह्मचर्य और अस्तेय जैसे महाव्रतों का संदेश दिया। उनका प्रसिद्ध संदेश “जियो और जीने दो” आज भी समाज को शांति और सह-अस्तित्व का मार्ग दिखाता है।
ऐसे मनाया जाता है महावीर जयंती का पर्व
इस दिन जैन समाज में कई धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं—
•सुबह-सुबह प्रभात फेरी और भजन-कीर्तन
•भगवान महावीर की भव्य रथ यात्रा
•जैन मंदिरों में अभिषेक और विशेष पूजा
•गरीबों और जरूरतमंदों को दान
•अहिंसा और सेवा का संकल्प
इस दिन क्या करें, क्या नहीं
महावीर जयंती के दिन विशेष रूप से अहिंसा पर जोर दिया जाता है—
•मांसाहार और मदिरा से पूरी तरह दूरी रखें
•पशु-पक्षियों को भोजन और पानी दें
•मंदिर जाकर पूजा और ध्यान करें
•घर में दीपक जलाकर शांति पाठ करें
31 मार्च 2026 को मनाई जाने वाली महावीर जयंती हमें यह याद दिलाती है कि सच्चा धर्म वही है, जिसमें करुणा, शांति और मानवता हो।यह पर्व केवल आस्था नहीं, बल्कि एक बेहतर समाज बनाने की प्रेरणा भी है।
“यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पंचांग पर आधारित है। विभिन्न संप्रदायों, क्षेत्रों और परंपराओं के अनुसार तिथि और पर्व मनाने के तरीकों में अंतर हो सकता है। कृपया अंतिम निर्णय के लिए अपने स्थानीय जैन मंदिर या मान्य पंचांग से पुष्टि अवश्य करें। किसी भी धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने का उद्देश्य नहीं है।”

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